लखनऊ, 08 मई 2026। उत्तर प्रदेश में मानसून से पहले बाढ़ सुरक्षा कार्य तेज करने के निर्देश देते हुए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों को साफ चेतावनी दी है कि अगर कार्यों में गड़बड़ी या गुणवत्ता में कमी मिली तो संबंधित अफसरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि संवेदनशील और अति संवेदनशील क्षेत्रों में चल रहे सभी बाढ़ बचाव कार्य 15 जून तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं।
शुक्रवार को लखनऊ स्थित सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने ड्रेन सफाई, तटबंध मरम्मत और जल निकासी से जुड़े कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मानसून आने से पहले तैयारियों में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।
बाढ़ सुरक्षा कार्य में गुणवत्ता से समझौता नहीं
बैठक के दौरान स्वतंत्र देव सिंह ने दो टूक कहा कि बाढ़ सुरक्षा कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और तय समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कहीं मानकों के विपरीत कार्य मिला तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मंत्री ने फील्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाने के भी निर्देश दिए ताकि कार्यों की वास्तविक स्थिति समय रहते सामने आ सके।
‘वन ड्रॉप मोर क्रॉप’ मॉडल पर नई परियोजनाएं तैयार करने के निर्देश
बैठक में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मंत्री ने सभी अभियंताओं से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में “वन ड्रॉप मोर क्रॉप” सिद्धांत पर आधारित कम से कम एक नवाचारी परियोजना का प्रस्ताव तैयार करें।
उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ने की जरूरत है। ऐसी तकनीकें विकसित करनी होंगी जिनसे कम पानी में किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सके। उनके मुताबिक आने वाले वर्षों में जल प्रबंधन ही कृषि व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है।
नहरों और जल वितरण व्यवस्था की भी हुई समीक्षा
जलशक्ति मंत्री ने बैठक में नहरों, रजबाहों, अल्पिकाओं और साइफन की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने मुख्य अभियंताओं को निर्देश दिए कि बैराज, फीडर और रेगुलेटरों के संचालन में जहां भी तकनीकी खामियां हैं, उन्हें तुरंत दूर किया जाए।
इसके साथ ही फील्ड अधिकारियों को मौके पर जाकर जल वितरण व्यवस्था का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि किसानों तक समय पर और समान रूप से पानी पहुंचना सुनिश्चित किया जाए।
लंबित परियोजनाएं समय पर पूरी करने पर जोर
बैठक में विभाग की लंबित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि अधूरी परियोजनाएं सरकारी संसाधनों पर बोझ बढ़ाती हैं और जनता को भी इसका नुकसान उठाना पड़ता है।
इस दौरान प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष संदीप कुमार समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।









