चेन्नई (Wed, 13 May 2026)। देशभर में NEET परीक्षा को लेकर बढ़ते विवाद और कथित पेपर लीक मामलों के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने एक बार फिर राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा को समाप्त करने की जोरदार मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाएं यह साबित करती हैं कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली गंभीर खामियों से घिरी हुई है।
मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से मांग की कि राज्यों को MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में दाखिला 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर देने की अनुमति मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश का अधिकार राज्यों के हाथ में होना चाहिए, ताकि स्थानीय छात्रों के साथ न्याय हो सके।
‘NEET की विश्वसनीयता लगातार सवालों में’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विजय ने लिखा कि यह पहली बार नहीं है जब NEET परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हों। उन्होंने 2024 में सामने आए पेपर लीक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय छह राज्यों में FIR दर्ज हुई थीं और मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी।
उन्होंने कहा कि उस विवाद के बाद इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी, जिसने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए 95 सिफारिशें दी थीं। लेकिन इतने बड़े सुधारात्मक कदमों के बावजूद दो साल के भीतर फिर पेपर लीक की घटनाएं सामने आना बेहद चिंताजनक है।
विजय ने कहा, “लगातार हो रही गड़बड़ियां यह साबित करती हैं कि राष्ट्रीय स्तर की यह परीक्षा संरचनात्मक रूप से कमजोर है और छात्रों का भविष्य इसके भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।”
तमिलनाडु लंबे समय से कर रहा NEET का विरोध
तमिलनाडु उन राज्यों में शामिल रहा है जिसने शुरुआत से ही NEET का विरोध किया है। राज्य सरकारों और कई छात्र संगठनों का तर्क है कि यह परीक्षा ग्रामीण, गरीब और क्षेत्रीय भाषा के छात्रों के साथ समान अवसर का व्यवहार नहीं करती।
राज्य का मानना है कि महंगे कोचिंग संस्थानों और अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले शहरी छात्रों को इस परीक्षा में स्पष्ट बढ़त मिलती है। दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों और तमिल माध्यम के प्रतिभाशाली छात्र प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट जाते हैं।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि NEET लागू होने के बाद ग्रामीण इलाकों के छात्रों की मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच कम हुई है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए डॉक्टर बनने का सपना और मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार लगातार यह मांग करती रही है कि राज्यों को अपने स्तर पर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया तय करने की स्वतंत्रता दी जाए।
12वीं के अंकों से मेडिकल एडमिशन की मांग
मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि राज्यों को राज्य कोटे की MBBS, BDS और AYUSH सीटों पर 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर प्रवेश देने की अनुमति मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे छात्रों पर परीक्षा का अतिरिक्त दबाव कम होगा और ग्रामीण व साधारण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को भी बराबरी का अवसर मिलेगा।
हालिया पेपर लीक विवाद के बाद NEET एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्षी दल लगातार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
केंद्र सरकार अब भी NEET के पक्ष में
हालांकि केंद्र सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) लगातार NEET का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि देशभर में मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को एक समान और पारदर्शी बनाने के लिए एक साझा परीक्षा जरूरी है।
केंद्र का दावा है कि NEET लागू होने के बाद निजी मेडिकल कॉलेजों और अलग-अलग राज्यों में होने वाली अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगी है। लेकिन लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मामलों ने इस परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
तमिलनाडु में यह मुद्दा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय अस्मिता से भी जुड़ चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में NEET को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।












