नई दिल्ली (Tue, 12 May 2026)। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve India) को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा भरोसा जताया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत के पास इस समय करीब 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से मजबूत स्थिति मानी जाती है।
दिल्ली में आयोजित औद्योगिक संगठन CII के कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार यदि किसी देश के पास 8 से 12 महीने के आयात के बराबर विदेशी मुद्रा भंडार हो, तो उसे आर्थिक रूप से सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में भारत की मौजूदा स्थिति स्थिर और भरोसेमंद है।
RBI के आंकड़ों में क्या सामने आया?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुताबिक मई 2026 के पहले सप्ताह तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 690 अरब डॉलर दर्ज किया गया। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 770 अरब डॉलर का आयात किया था। इस आधार पर देखा जाए तो भारत हर महीने औसतन 64 अरब डॉलर का आयात कर रहा है।
यानी मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार देश की आयात जरूरतों को करीब 11 महीने तक पूरा करने में सक्षम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्तर वैश्विक बाजार में भारत की आर्थिक विश्वसनीयता को मजबूत करता है।
Forex Reserve India के बीच पीएम मोदी की अपील पर मचा था विवाद
हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सोने की खरीदारी टालने और अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने की अपील की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
इसी मुद्दे पर पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री का संदेश केवल जागरूकता और जिम्मेदार आर्थिक व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए था। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इस अपील को गलत तरीके से पेश किया।
गोयल ने साफ कहा कि व्यापार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विदेशी दौरों पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे निवेश आकर्षित करने और वैश्विक बाजारों में भारत की मौजूदगी बढ़ाने के लिए विदेश यात्राएं जारी रखें।
‘चुनौती को अवसर में बदलना भारत की ताकत’
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि तमाम वैश्विक संकटों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तु और सेवा क्षेत्र को मिलाकर 863 अरब डॉलर का निर्यात किया है। उन्होंने इसे भारतीय उद्योग और निर्यात क्षमता की बड़ी उपलब्धि बताया।
गोयल ने कहा कि भारत कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदलना जानता है और मौजूदा समय देश के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में खुद को स्थापित करने का अहम मौका है। उन्होंने गुणवत्ता सुधार, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर भी जोर दिया।
MSME और IT सेक्टर को लेकर भी सरकार का फोकस
गोयल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि भारत लगातार विकसित देशों के साथ बड़े व्यापार समझौते कर रहा है और अब भारतीय उद्यमियों की जिम्मेदारी है कि वे इन बाजारों में निर्यात बढ़ाएं।
वहीं आईटी सेक्टर के संगठन नैसकॉम ने भी कहा कि देश की कई बड़ी आईटी कंपनियां पहले से ही हाइब्रिड वर्क मॉडल पर काम कर रही हैं। यानी कर्मचारी घर और ऑफिस दोनों जगहों से काम कर रहे हैं। कुछ कंपनियों में महीने में सीमित दिनों के लिए ऑफिस आना अनिवार्य रखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत Forex Reserve India, बढ़ता निर्यात और वैश्विक व्यापार समझौते आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकते हैं।











