नई दिल्ली, 14 मई 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स समूह बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को गति देने और अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से उठाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक असंतुलन और वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर बहस के दौर से गुजर रही है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सरकार इसे वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए एक बड़े अवसर के रूप में पेश कर रही है।
‘ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं का मंच बन चुका है BRICS’
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि BRICS अब केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह विकासशील देशों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर आवाज देने वाला प्रभावशाली मंच बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आज दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में जरूरी है कि बहुपक्षवाद को मजबूत किया जाए और सभी देशों को समान अवसर मिले।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो ताकि विकासशील देशों की चिंताओं और जरूरतों को नजरअंदाज न किया जाए।
आर्थिक सहयोग और संतुलित विश्व व्यवस्था पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी BRICS को लेकर अपनी प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान BRICS आर्थिक मजबूती, वैश्विक सहयोग और संतुलित विश्व व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत BRICS के जरिए खुद को ग्लोबल साउथ की एक मजबूत आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दों पर विकासशील देशों के पक्ष को मजबूती से रखा है।
नई दिल्ली में हो रही यह बैठक भी उसी रणनीतिक कूटनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
रूस के विदेश मंत्री लावरोव से भी हुई अहम मुलाकात
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया की स्थिति और अन्य क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, पीएम मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि भारत विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि युद्ध और तनाव किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते।
बैठक के दौरान भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की भी समीक्षा की गई। यह चर्चा दिसंबर 2025 में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद शुरू हुई पहलों की प्रगति से जुड़ी रही।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।
नई दिल्ली में शुरू हुई दो दिवसीय BRICS बैठक
नई दिल्ली में गुरुवार से शुरू हुई दो दिवसीय BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कर रहे हैं। बैठक में BRICS सदस्य देशों के अलावा कई साझेदार देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं।
सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी साझेदारी और विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो रही है।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत इस मंच के जरिए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, समावेशी विकास और वैश्विक दक्षिण के हितों को केंद्र में रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
BRICS क्यों बनता जा रहा है अहम?
विशेषज्ञों का कहना है कि BRICS धीरे-धीरे पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले वैश्विक ढांचे के समानांतर एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभर रहा है। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे बड़े विकासशील देश शामिल हैं, जबकि हाल के वर्षों में इसका विस्तार भी हुआ है।
भारत की कोशिश है कि BRICS केवल आर्थिक मंच न रहकर वैश्विक नीति निर्माण में भी मजबूत भूमिका निभाए। प्रधानमंत्री मोदी का भाषण इसी व्यापक दृष्टिकोण का संकेत माना जा रहा है।













