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यूपी में अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़कर हुआ 17 हजार, CM योगी ने लोकभवन में वितरित किए चेक

On: May 17, 2026
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यूपी में अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़कर हुआ 17 हजार, CM योगी ने लोकभवन में वितरित किए चेक
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लखनऊ|17 मई 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के हजारों अंशकालिक अनुदेशकों को बड़ी राहत देते हुए उनका मानदेय बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। रविवार को लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बढ़े हुए मानदेय के प्रतीकात्मक चेक वितरित किए और कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ शिक्षकों के सम्मान और सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान शिक्षा व्यवस्था, बच्चों के अनुशासन और विद्यालयों की बदलती तस्वीर पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि बच्चों को जरूरत से ज्यादा संवेदनशील बनाने के बजाय उन्हें जिम्मेदार, आत्मनिर्भर और अनुशासित नागरिक बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।

अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ने से मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वर्ष 2011-12 में छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 41,307 अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति की गई थी। उस समय उन्हें सात हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता था।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 से 2022 तक मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। हालांकि वर्ष 2022 में सरकार ने दो हजार रुपये की वृद्धि की थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 24,296 अनुदेशक सेवाएं दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुदेशकों ने हमेशा सकारात्मक संवाद और संयम का रास्ता अपनाया, इसलिए सरकार ने भी उनके हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी उनके हितों को लेकर सकारात्मक फैसले लिए जाते रहेंगे।

स्वास्थ्य बीमा और हेल्थ कार्ड की भी सुविधा

सरकार ने अनुदेशकों को सिर्फ बढ़ा हुआ मानदेय ही नहीं दिया, बल्कि कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा भी शुरू की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी अनुदेशक बेसिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर जल्द पंजीकरण कराएं ताकि अगले सप्ताह से हेल्थ कार्ड वितरण की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और सरकार उनके हितों के लिए लगातार काम कर रही है।

CM योगी बोले- बच्चों में अनुशासन और जिम्मेदारी जरूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे स्कूल में स्वच्छता या जिम्मेदारी से जुड़े कार्यों में सहयोग करते हैं तो उसे नकारात्मक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

सीएम योगी ने कहा कि बच्चों में श्रम के प्रति सम्मान, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना शिक्षा का अहम हिस्सा है। उन्होंने साफ कहा कि यदि कोई शिक्षक बच्चों को स्वच्छता जैसे कार्यों से जोड़ता है तो उसे दंडित नहीं, बल्कि सम्मानित किया जाना चाहिए।

स्कूल चलो अभियान और ऑपरेशन कायाकल्प का असर

मुख्यमंत्री ने बताया कि कई विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने के कारण अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त करने के प्रस्ताव आए थे, लेकिन सरकार ने उन्हें खारिज कर दिया। इसके बजाय ‘स्कूल चलो अभियान’ और ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ जैसी योजनाएं शुरू की गईं।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के 96 प्रतिशत विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ड्रॉपआउट दर, जो पहले 17 से 18 प्रतिशत तक थी, अब घटकर लगभग तीन प्रतिशत रह गई है। सरकार का लक्ष्य इसे पूरी तरह शून्य तक पहुंचाना है।

उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर और अन्य सुविधाओं के लिए धनराशि सीधे अभिभावकों के खातों में भेजी जा रही है। साथ ही समय पर किताबें उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।

हर जिले में बनेंगे मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों और निराश्रित बच्चों के लिए प्रदेश में 18 अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जहां करीब 18 हजार बच्चों के रहने और पढ़ाई की व्यवस्था की गई है।

इसी मॉडल पर अब हर जिले में दो-दो मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को 12वीं तक अपग्रेड करने की प्रक्रिया भी जारी है। सभी 825 विकासखंडों में नए विद्यालयों के लिए धनराशि जारी कर दी गई है।

बुके की जगह पुस्तकों से हुआ सम्मान

लोकभवन में आयोजित समारोह की एक खास बात यह भी रही कि पारंपरिक बुके की जगह पुस्तकों को सम्मान का माध्यम बनाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कृति ‘रश्मिरथी’ और ‘संस्कृति के चार अध्याय’ भेंट की गई।

वहीं उप मुख्यमंत्री और मंत्रियों को शिवाजी सावंत की चर्चित पुस्तक ‘युगंधर’ भेंट कर सम्मानित किया गया। इस पहल को कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम बताया।

कई जिलों के अनुदेशकों को मिला प्रतीकात्मक चेक

कार्यक्रम में गोरखपुर, वाराणसी, अयोध्या, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर, हमीरपुर, लखनऊ, अलीगढ़, उन्नाव और हरदोई समेत विभिन्न जिलों के 14 अनुदेशकों को प्रतीकात्मक चेक प्रदान किए गए।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विभाग की उपलब्धियां गिनाईं, जबकि कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि अनुदेशकों की लंबे समय से चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हो गई है। कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, लालजी प्रसाद निर्मल, विधायक नीरज बोरा और अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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