लखनऊ|23 मई 2026: लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार मौसम आधारित आपदा प्रबंधन को नई दिशा देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट कहा कि मौसम की चेतावनी तभी प्रभावी मानी जाएगी जब उसकी जानकारी समय रहते अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तकनीक आधारित पूर्व चेतावनी तंत्र को गांवों, संवेदनशील इलाकों और आम नागरिकों तक अधिक तेज, सटीक और भरोसेमंद तरीके से पहुंचाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं में कई बार कुछ मिनट और कुछ घंटे भी जीवन और नुकसान के बीच अंतर तय कर देते हैं। ऐसे में यूपी मौसम पूर्व चेतावनी प्रणाली को केवल डेटा और पूर्वानुमान तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
मौसम अलर्ट के साथ ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ पर सरकार का फोकस
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चेतावनी प्रणाली का अंतिम लक्ष्य लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाना होना चाहिए। इसके लिए आईवीआरएस, पंचायत स्तर के लाउडस्पीकर, स्थानीय एफएम रेडियो, मोबाइल अलर्ट, सोशल मीडिया और स्थानीय प्रशासन के नेटवर्क का व्यापक उपयोग किया जाए।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और आपदा संवेदनशील इलाकों में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे मौसम चेतावनी केवल सरकारी फाइलों या डिजिटल डैशबोर्ड तक सीमित न रह जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आपदा के समय सूचना का प्रवाह जितना तेज होगा, नुकसान को उतना कम किया जा सकेगा।
13 मई के आंधी-तूफान की समीक्षा, पहले से जारी थे अलर्ट
बैठक में 13 मई 2026 को आए तेज आंधी-तूफान की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय मौसम विभाग के मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम (MHEWS) के जरिए इस मौसमीय गतिविधि पर सात दिन पहले से निगरानी रखी जा रही थी।
शुरुआत में येलो वार्निंग जारी की गई थी, जिसे बाद में ऑरेंज और कई जिलों के लिए रेड अलर्ट तक अपग्रेड किया गया। चेतावनियों में तेज हवाएं, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार से हवा चलने की आशंका जताई गई थी।
कई इलाकों में हवा की वास्तविक गति 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई।
कई जिलों में नाउकास्ट अलर्ट, एसएमएस और स्थानीय नेटवर्क से पहुंची सूचना
समीक्षा के दौरान बताया गया कि भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, रायबरेली, कानपुर नगर और उन्नाव समेत कई जिलों के लिए 70–80 किलोमीटर प्रति घंटा की संभावित हवा को लेकर नाउकास्ट अलर्ट जारी किए गए थे।
“सचेत” प्लेटफॉर्म के जरिए कलर-कोडेड अलर्ट जिला प्रशासन, आपदा मित्रों और संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाए गए। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय मोबाइल फोनों पर एसएमएस आधारित चेतावनियां भी भेजी गईं।
स्थानीय टीवी चैनलों, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप समूहों, ग्राम प्रधानों, लेखपालों और आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी लोगों तक लगातार जानकारी पहुंचाई गई।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से पूर्व सूचना मिलने के बाद की गई कार्रवाई का भी विस्तृत फीडबैक लिया।
जागरूकता अभियान और स्थानीय एसओपी तैयार करने के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केवल अलर्ट जारी करना पर्याप्त नहीं है, लोगों को यह भी पता होना चाहिए कि ऐसी स्थिति में सुरक्षित व्यवहार क्या होना चाहिए।
उन्होंने स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही पेड़ों, बिजली के खंभों, बड़े होर्डिंग्स और कमजोर अस्थायी संरचनाओं की स्थानीय स्तर पर पहचान कर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने को कहा।
प्रदेश में मजबूत हो रहा मौसम निगरानी नेटवर्क
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में मौसम की निगरानी के लिए डॉप्लर वेदर रडार, ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS), ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG), लाइटनिंग सेंसर, सैटेलाइट इमेज और न्यूमेरिकल वेदर प्रिडिक्शन मॉडल का उपयोग किया जा रहा है।
वर्तमान में प्रदेश में 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज स्थापित किए जा चुके हैं। अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि बरेली, देवरिया और प्रयागराज में अतिरिक्त रडार लगाने की प्रक्रिया जारी है।
इसके अलावा लखनऊ और प्रयागराज में विंड प्रोफाइलर रडार स्थापित करने का कार्य भी प्रगति पर है।
आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए यूएनडीपी के सहयोग से प्रदेश के सभी 75 जिलों और प्रमुख शहरों के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार किए जा रहे हैं।










