लखनऊ|23 मई 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने राजस्व मामलों के निस्तारण को प्रशासनिक प्राथमिकताओं के केंद्र में रखने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद केवल फाइलों तक सीमित विषय नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा संबंध किसानों, ग्रामीण परिवारों, संपत्ति अधिकारों और सामाजिक संतुलन से जुड़ा होता है। ऐसे में लंबित मामलों को केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि लोगों को वास्तविक राहत देकर समाप्त किया जाना चाहिए।
शनिवार को लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की प्रगति का आकलन किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि तय समय-सीमा के बाद भी लंबित रहने वाले मामलों में जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
‘आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, जनता को महसूस होना चाहिए न्याय’
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन केवल निस्तारित मामलों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिसमें नागरिकों को समय पर राहत और न्याय मिलता दिखाई दे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि तहसील और जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए तथा जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर है, वहां प्रशासनिक निगरानी बढ़ाई जाए। साथ ही तकनीक आधारित व्यवस्था को और मजबूत करते हुए न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
धारा-80 के मामलों में लंबित वादों में बड़ी कमी
समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार आरसीसीएमएस पोर्टल के जरिए धारा-80 के अंतर्गत लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
1 जनवरी 2026 तक कुल 85,158 वाद लंबित थे, जिनमें 77,578 मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं 22 मई 2026 तक लंबित मामलों की संख्या घटकर 38,166 रह गई और 29,543 मामलों का निस्तारण किया गया।
इस श्रेणी में बस्ती, चित्रकूट, अयोध्या, बागपत और कन्नौज बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल रहे। दूसरी ओर मेरठ, वाराणसी, अमेठी, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों में दर्ज किए गए।
धारा-34 के मामलों में भी तेजी, लेकिन कुछ जिलों को सुधार की जरूरत
धारा-34 के अंतर्गत लंबित राजस्व वादों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 को 22,44,466 मामले लंबित थे, जो 22 मई 2026 तक घटकर 10,59,139 रह गए।
इस अवधि में 5,40,945 मामलों का निस्तारण किया गया।
समीक्षा में बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और बदायूं को बेहतर प्रदर्शन करने वाला पाया गया, जबकि गोरखपुर, संतकबीरनगर, प्रतापगढ़, बलिया और देवरिया अपेक्षित प्रगति हासिल नहीं कर सके। मुख्यमंत्री ने इन जिलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।
वरासत और अन्य मामलों में समयबद्ध कार्रवाई पर जोर
धारा-33 के तहत निर्विवादित वरासत मामलों की समीक्षा में बताया गया कि वर्ष 2025 में 16,89,732 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 16,43,104 का निस्तारण किया गया।
वहीं 22 मई 2026 तक प्राप्त 7,15,872 आवेदनों में से 6,52,512 मामलों का समाधान किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नागरिकों को वरासत जैसे मामलों में बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और प्रक्रिया को सरल व समयबद्ध बनाया जाए।
पुराने लंबित मामलों की अलग सूची बनाकर होगी कार्रवाई
बैठक में धारा-24 और धारा-116 से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों से लंबित पुराने मामलों की अलग पहचान की जाए और उनके लिए विशेष रणनीति तैयार की जाए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में समय सीमा तय कर लंबित मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए जिससे जनता का भरोसा और मजबूत हो तथा न्याय पाने के लिए लोगों को अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।
प्रशासनिक संदेश साफ: फाइलों से बाहर दिखना चाहिए परिणाम
सरकार की इस समीक्षा बैठक से यह संकेत साफ है कि आने वाले समय में राजस्व मामलों में केवल प्रगति रिपोर्ट नहीं, बल्कि जमीनी परिणामों पर अधिक जोर दिया जाएगा। प्रशासनिक मशीनरी के लिए यह संदेश भी स्पष्ट है कि लंबित मामलों का बोझ कम करना अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि जवाबदेही का हिस्सा होगा।










