नई दिल्ली|03 जून 2026: भारत और लाओस के बीच दशकों पुराने दोस्ताना रिश्तों को नई गति देने की दिशा में बुधवार को महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (लाओस) के उप प्रधानमंत्री थोंगसावन फोम विहाने के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। बातचीत के केंद्र में राजनीतिक सहयोग, आर्थिक साझेदारी, रक्षा संबंध, शिक्षा, संस्कृति और क्षेत्रीय सहयोग जैसे अहम विषय रहे।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। 10वीं भारत-लाओस संयुक्त आयोग की बैठक के अवसर पर हुई इस चर्चा को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत-लाओस संबंधों को नई दिशा देने पर जोर
बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और लाओस के रिश्ते केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराना सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव भी मौजूद है। उन्होंने बौद्ध धर्म और रामायण जैसी साझा विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यही ऐतिहासिक आधार आज भी दोनों देशों के संबंधों को मजबूती प्रदान करता है।
जयशंकर ने विश्वास जताया कि मौजूदा दौर में बढ़ता सहयोग दोनों देशों को नई संभावनाओं की ओर ले जाएगा। उन्होंने वर्ष 2024 में अपनी लाओस यात्रा को याद करते हुए कहा कि उस दौरान भी दोनों देशों के बीच सहयोग को विस्तार देने पर सकारात्मक चर्चा हुई थी। उस समय लाओस, आसियान (ASEAN) की अध्यक्षता कर रहा था।
पीएम मोदी की लाओस यात्रा के नतीजों की समीक्षा
वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अक्टूबर 2024 की लाओस यात्रा का भी विशेष उल्लेख हुआ। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते और सहमति पत्र (MoUs) हस्ताक्षरित हुए थे।
बुधवार की बैठक में उन समझौतों की प्रगति की समीक्षा की गई और यह देखा गया कि विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को किस तरह और प्रभावी बनाया जा सकता है। दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग, विकास परियोजनाओं, शिक्षा आदान-प्रदान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत और लाओस के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
व्यापार और निवेश के नए अवसरों पर भी हुई चर्चा
लाओस के उप प्रधानमंत्री थोंगसावन फोम विहाने ने नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया-लाओस बिजनेस फोरम’ में भी हिस्सा लिया। इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को लाओस में निवेश और व्यापार की संभावनाओं से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और अब इसे आर्थिक साझेदारी के नए स्तर तक ले जाने का समय है। उन्होंने भारतीय कंपनियों को लाओस में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, कृषि, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने का निमंत्रण दिया।
रणनीतिक साझेदारी पर लाओस का विशेष जोर
अपने संबोधन में फोम विहाने ने स्पष्ट किया कि लाओस केवल विदेशी निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भारत के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी विकसित करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि भारत और लाओस के बीच आपसी विश्वास, साझा सांस्कृतिक मूल्यों और लंबे समय से चले आ रहे सहयोग ने संबंधों को एक मजबूत आधार दिया है। आने वाले वर्षों में दोनों देश इस साझेदारी को व्यापार, शिक्षा, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में और अधिक विस्तार देने की दिशा में काम करेंगे।
भारत-लाओस संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई यह उच्चस्तरीय बैठक इस बात का संकेत है कि दोनों देश भविष्य में अपने रिश्तों को केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उन्हें व्यापक रणनीतिक और आर्थिक सहयोग में बदलने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं।










