नई दिल्ली, 26 जुलाई। ट्रेनों में बढ़ती भीड़ और खासकर जनरल और स्लीपर कोच में सीटों की मारामारी को कम करने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने संसद में जानकारी दी कि लंबी दूरी की ट्रेनों में जनरल कोचों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही आम और मध्यम आय वर्ग के यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए 17 हजार नए नॉन-एसी कोच तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा पूरी तरह नॉन-एसी अमृत भारत ट्रेनों के विस्तार की योजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
रेलवे का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य उन यात्रियों को राहत देना है जो रोजमर्रा या लंबी दूरी की यात्रा में जनरल और स्लीपर श्रेणी पर सबसे अधिक निर्भर रहते हैं।
जनरल कोच बढ़ाकर भीड़ कम करने की तैयारी
रेल मंत्रालय के अनुसार, वर्षभर ट्रेनों में यात्रियों की संख्या समान नहीं रहती। गर्मी की छुट्टियों, त्योहारों और विशेष अवसरों पर कई रूटों पर ट्रेनों में क्षमता से अधिक भीड़ हो जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए पिछले दो वर्षों में कई लंबी दूरी की ट्रेनों में स्थायी रूप से अतिरिक्त जनरल कोच जोड़े गए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में 1,250 अतिरिक्त जनरल कोच विभिन्न ट्रेनों में लगाए गए ताकि अधिकांश ट्रेनों में कम से कम चार जनरल कोच उपलब्ध रह सकें। 2025-26 में 870 अतिरिक्त कोच शामिल किए गए, जिनमें 160 जनरल कोच थे। वहीं 2026-27 में 30 जून तक 190 नए कोच जोड़े जा चुके हैं, जिनमें 20 जनरल कोच शामिल हैं।
रेलवे का मानना है कि इससे सामान्य श्रेणी के यात्रियों को अधिक सीटें मिलेंगी और भीड़ का दबाव कम होगा।
17 हजार नए नॉन-एसी कोच होंगे तैयार
रेलवे ने बताया कि कम और मध्यम आय वर्ग के यात्रियों की जरूरतों को देखते हुए 17 हजार नए नॉन-एसी कोच तैयार किए जा रहे हैं। वर्तमान में भारतीय रेलवे के लगभग 89 हजार कोचों में करीब 70 प्रतिशत नॉन-एसी और 30 प्रतिशत एसी कोच हैं।
रेलवे की मौजूदा नीति के अनुसार, 22 कोच वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में 12 जनरल और नॉन-एसी स्लीपर कोच तथा 8 एसी कोच रखे जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को किफायती यात्रा का विकल्प मिल सके।
अमृत भारत ट्रेनों का भी होगा विस्तार
रेलवे ने बताया कि निम्न और मध्यम आय वर्ग के यात्रियों के लिए शुरू की गई अमृत भारत ट्रेन पूरी तरह नॉन-एसी श्रेणी की है। इसकी एक रेक में 11 जनरल कोच, 8 स्लीपर कोच, एक पैंट्री कार और दो लगेज-सह-दिव्यांग कोच शामिल हैं।
इन ट्रेनों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिनका डिजाइन यात्रियों की सुविधा और लंबी दूरी की यात्रा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। रेलवे भविष्य में ऐसी ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग में भी बढ़ी पारदर्शिता
रेलवे ने डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने के साथ टिकट बुकिंग प्रणाली को भी अधिक सुरक्षित बनाया है। रेल वन ऐप को अब तक 4.55 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है और इसके जरिए प्रतिदिन औसतन 9.65 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं।
जून 2025 से जून 2026 के बीच रेलवे में 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक हुए। इनमें 89 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन और 11 प्रतिशत टिकट रेलवे काउंटरों से जारी किए गए।
कवच सुरक्षा प्रणाली का तेजी से हो रहा विस्तार
रेल मंत्रालय ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कवच 4.0 सुरक्षा प्रणाली का विस्तार लगातार किया जा रहा है। यह स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रेल मार्गों के 2,490 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है।
वर्तमान में 21,937 रूट किलोमीटर पर कवच लगाने का कार्य जारी है। इसके साथ ही 7,435 लोकोमोटिव और 1,200 ईएमयू/मेमू ट्रेनों में भी इस प्रणाली को स्थापित किया जा रहा है।
रेलवे में बढ़ा विद्युतीकरण और भर्ती अभियान
रेलवे ने बताया कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच एलएचबी कोचों का उत्पादन बढ़कर 49,366 तक पहुंच गया है। वहीं 99.6 प्रतिशत ब्रॉड गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है, जिससे भारत रेलवे विद्युतीकरण के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
ईंधन की खपत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। 2015-16 में जहां रेलवे 293 करोड़ लीटर डीजल का उपयोग करता था, वहीं 2024-25 में यह घटकर 108 करोड़ लीटर रह गया है। इसके अलावा रेलवे में 1,260 मेगावाट से अधिक सौर और पवन ऊर्जा क्षमता भी विकसित की जा चुकी है।
रोजगार के मोर्चे पर भी रेलवे ने बताया कि 2014 से जून 2026 तक 5.56 लाख से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं। वहीं 2024, 2025 और 2026 के भर्ती कैलेंडर के तहत 1.61 लाख से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है।











