नई दिल्ली/09 जून 2026: देश की सीमा सुरक्षा और सीमा पार व्यापार को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) का शुभारंभ किया। इस नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत बनाना, व्यापार प्रक्रियाओं को आसान करना और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि देश में वर्तमान समय में 15 लैंड पोर्ट संचालित हो रहे हैं, जबकि अगले तीन वर्षों में 11 नए लैंड पोर्ट विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत का लैंड पोर्ट व्यापार बढ़कर 83 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है।
लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से खत्म होगी कागजी प्रक्रिया
गृह मंत्री ने कहा कि लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के लागू होने के बाद सीमा क्षेत्रों में होने वाली अधिकांश कागजी प्रक्रियाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित हो जाएंगी। उनके अनुसार वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत कामकाज दस्तावेजों और मैनुअल प्रक्रियाओं के माध्यम से होता है, जिसे नई प्रणाली काफी हद तक समाप्त कर देगी।
उन्होंने बताया कि सिंगल इलेक्ट्रॉनिक विंडो व्यवस्था के जरिए व्यापार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में 40 से 60 प्रतिशत तक समय की बचत संभव होगी। इससे सीमा पर माल ढुलाई, वाहन संचालन और विभिन्न अनुमतियों से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक तेज और पारदर्शी बनेंगी।
स्मार्ट बॉर्डर योजना से बढ़ेगी सीमा सुरक्षा
अमित शाह ने कहा कि सरकार स्मार्ट बॉर्डर योजना के तहत सीमाओं को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। आधुनिक डिजिटल तंत्र के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी और सीमा प्रबंधन को अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा केवल सैन्य दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता से भी जुड़ा विषय है। बेहतर सीमा प्रबंधन से सीमावर्ती जिलों में रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे पलायन की समस्या को भी कम करने में मदद मिलेगी।
एक ही मंच पर जुड़ेंगी कई महत्वपूर्ण एजेंसियां
नई प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विभिन्न सरकारी और सुरक्षा एजेंसियां एक ही डिजिटल मंच पर रियल-टाइम डेटा साझा कर सकेंगी। इसके अंतर्गत आईसीईगेट, मोटर वाहन प्रणाली, सीबीआईसी, बीएसएफ, डीजीएफटी, यूआईडीएआई और यूएलआईपी जैसी संस्थाओं को एकीकृत किया जाएगा।
इससे सीमा पर कार्यरत एजेंसियों के बीच सूचना का आदान-प्रदान तेज होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल समन्वय से सुरक्षा और व्यापार दोनों क्षेत्रों में बेहतर परिणाम मिलेंगे।
12 वर्षों में 16 गुना बढ़ा लैंड पोर्ट व्यापार
गृह मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान व्यापारिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में देश का लैंड पोर्ट व्यापार लगभग 5 हजार करोड़ रुपये था। अब यह बढ़कर 83 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
उनके अनुसार पिछले 12 वर्षों में सीमा पार व्यापार में लगभग 16 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि बेहतर आधारभूत ढांचे, डिजिटल सुधारों और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के प्रयासों का परिणाम है।
सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में निभाएंगे अहम भूमिका
अमित शाह ने कहा कि लैंड पोर्ट केवल व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक संपर्क और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा कि लैंड पोर्ट अथॉरिटी अब देश की चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा रणनीति के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रही है।
नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए कार्गो प्रबंधन, वाहनों की आवाजाही और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम सीमा प्रबंधन को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।











