नई दिल्ली|25 जून 2026: देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आयोजित 52वीं प्रगति (PRAGATI) बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था को देश के सभी राज्यों में जल्द से जल्द लागू किया जाए। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कार्रवाई तेज होगी और अपराधियों तक पहुंचना पहले से अधिक आसान हो सकेगा।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल माध्यमों से होने वाले अपराध लगातार नए रूप ले रहे हैं। ऐसे में शिकायत दर्ज करने से लेकर जांच शुरू करने तक की पूरी प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) के साथ समन्वय स्थापित कर इस व्यवस्था के शीघ्र क्रियान्वयन की दिशा में काम करने को कहा।
ई-जीरो एफआईआर की प्रगति की खुद करेंगे समीक्षा
सभी राज्यों के मुख्य सचिवों की मौजूदगी में हुई बैठक में साइबर अपराध, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और तथाकथित डिजिटल गिरफ्तारी जैसे मामलों की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि ई-जीरो एफआईआर की प्रगति पर नियमित निगरानी रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों में शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि शिकायत मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज होकर जांच शुरू हो जाए तो कई मामलों में धनराशि को रोका जा सकता है और अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सकता है। यही कारण है कि इस व्यवस्था को पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है।
क्या है ई-जीरो एफआईआर पहल?
ई-जीरो एफआईआर गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की नई पहल है। इस प्रणाली के तहत सत्यापित और उच्च मूल्य वाले साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों को स्वतः Zero FIR में परिवर्तित किया जाता है।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पीड़ित को अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) जैसी कानूनी प्रक्रियाओं में समय नहीं गंवाना पड़ता। शिकायत मिलते ही जांच एजेंसियां तत्काल कार्रवाई शुरू कर सकती हैं, जिससे संदिग्ध लेनदेन को रोकने और ठगी की रकम को सुरक्षित रखने की संभावना बढ़ जाती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग पर जताई चिंता
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों को ठगने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्मों के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्मों के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि तकनीक का उपयोग नागरिकों की सुरक्षा के लिए होना चाहिए, न कि अपराधियों के लिए अवसर बनने के रूप में।










