लखनऊ, 29 जून। उत्तर प्रदेश को देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में शामिल करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में UP Ease of Doing Business सुधारों को तेज गति से लागू करने पर जोर दिया गया। बैठक में निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, अनावश्यक नियमों को समाप्त करने और उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी माहौल तैयार करने को प्राथमिकता दी गई।
बैठक में ‘अनुपालन न्यूनीकरण एवं विनियमन शिथिलीकरण-2025’ के तहत विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उद्योगों और निवेशकों पर अनुपालन का बोझ कम करने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
डिरेगुलेशन 2.0 से निवेश और रोजगार को मिलेगी गति
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कहा कि डिरेगुलेशन 2.0 के तहत लागू किए जा रहे सुधार राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे। इससे नए निवेश आकर्षित होंगे, उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही किसानों और भूमि स्वामियों को कई जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश के समग्र आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी।
एक सप्ताह में मांगी गई विभागवार रिपोर्ट
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित सुधारों का गहन अध्ययन कर शीघ्र अमल सुनिश्चित किया जाए। जिन प्रस्तावों को तत्काल लागू करना संभव नहीं है, उनके कारणों सहित एक सप्ताह के भीतर इन्वेस्ट यूपी को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों की सफल कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उत्तर प्रदेश में भी उन्हें आवश्यकतानुसार अपनाया जाए, ताकि निवेशकों को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके।
भूमि, भवन निर्माण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया होगी आसान
बैठक में निवेश संबंधी कई महत्वपूर्ण सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें भूमि उपयोग नियमों को सरल बनाना, औद्योगिक क्लस्टरों में भूमि के बेहतर उपयोग की व्यवस्था विकसित करना और भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं तेज बनाना प्रमुख रहा।
इसके अलावा अग्निशमन मानकों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाने, व्यवसायों के लिए ड्यूल लाइसेंसिंग समाप्त करने, दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से जुड़े नियमों में उदारीकरण तथा लीगल मेट्रोलॉजी से संबंधित लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
एमएसएमई, बिजली और पर्यावरण मंजूरी पर भी विशेष जोर
बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण को औद्योगिक क्लस्टरों के लिए एकल नोडल एजेंसी बनाया जाए। एमएसएमई इकाइयों को सेल्फ-डिक्लेरेशन आधारित सुविधाएं देने, बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को तेज करने और पर्यावरण स्वीकृति संबंधी बैठकों को नियमित बनाने पर भी सहमति बनी।
साथ ही डिग्रेडेड फॉरेस्ट और नॉन-फॉरेस्ट भूमि का लैंड बैंक विकसित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई, जिससे भविष्य की औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आसान हो सके।
पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को भी मिलेगा लाभ
बैठक में पर्यटन क्षेत्र में किफायती और गुणवत्तापूर्ण आवास सुविधाओं को बढ़ावा देने, निजी शिक्षण संस्थानों के लिए भूमि एवं आधारभूत संरचना संबंधी शर्तों को सरल बनाने तथा स्वास्थ्य क्षेत्र की लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान करने पर भी विचार किया गया।
इसके अलावा सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सेवाओं की समय-सीमा कम करने और निवेशकों को तेज़ एवं पारदर्शी मंजूरी उपलब्ध कराने पर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा डॉ. आशीष कुमार गोयल, अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय किरन आनंद, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. सारिका मोहन, आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य सरकार का मानना है कि इन सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश में निवेश का माहौल और मजबूत होगा तथा राज्य उद्योग, रोजगार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर होगा।









