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E20 पेट्रोल: सरकार ने 10 बड़े सवालों पर दी सफाई, माइलेज में हल्की कमी की बात मानी

On: July 5, 2026
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E20 पेट्रोल, सरकार ने 10 बड़े सवालों पर दी सफाई
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नई दिल्ली/05 जुलाई 2026: देशभर में E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर माइलेज घटने, इंजन खराब होने, वारंटी और बीमा खत्म होने से लेकर पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाने जैसे कई दावे वायरल हो रहे हैं। इन दावों के बीच केंद्र सरकार ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर E20 पेट्रोल से जुड़े प्रमुख सवालों के जवाब दिए हैं और कई भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद बढ़ी चर्चा

E20 पेट्रोल को लेकर विवाद उस समय तेज हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि के एक बयान को लेकर यह चर्चा शुरू हुई कि E20 अभी “प्रयोग” के चरण में है। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय इथेनॉल की आपूर्ति व्यवस्था से था, न कि ईंधन के परीक्षण से। इसके बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर बिंदुवार जवाब जारी किए।

क्या E20 पेट्रोल से माइलेज कम होता है?

सरकार ने माना है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर माइलेज में हल्की कमी आ सकती है। इसकी वजह यह है कि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होती है। विभिन्न परीक्षणों के अनुसार माइलेज में लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है।

क्या इंजन को नुकसान पहुंचता है?

मंत्रालय के अनुसार, एआरएआई (ARAI), इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए परीक्षणों में इंजन, धातु या प्लास्टिक के पुर्जों को कोई गंभीर नुकसान नहीं मिला। हालांकि, कुछ पुरानी गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों को सामान्य से पहले बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है।

वारंटी और बीमा पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 के अनुरूप तैयार या स्वीकृत वाहनों की कंपनी वारंटी और बीमा पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। दोनों सुविधाएं पहले की तरह लागू रहेंगी।

क्या बिना परीक्षण के बाजार में आया E20?

सरकार ने इस दावे को गलत बताया है। मंत्रालय के अनुसार अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में वर्षों से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग किया जा रहा है। भारत में भी एआरएआई की निगरानी में हजारों किलोमीटर तक परीक्षण किए गए हैं।

पानी की खपत और गन्ने के रस को लेकर क्या कहा?

सरकार के मुताबिक, एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10 हजार लीटर पानी खर्च होने का दावा पूरी तरह गलत है। डिस्टिलरी में प्रति लीटर इथेनॉल उत्पादन के लिए लगभग 3 से 5 लीटर प्रसंस्कृत पानी का उपयोग होता है, जिसे बाद में दोबारा रिसाइकिल किया जाता है।

मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस या चीनी नहीं मिलाई जाती। फ्यूल-ग्रेड इथेनॉल औद्योगिक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार ही पेट्रोल में मिलाया जाता है।

चींटियां, मधुमक्खियां और टंकी में पानी जमा होने का दावा भी गलत

सरकार ने कहा कि फ्यूल-ग्रेड इथेनॉल में चीनी नहीं होती और उसमें ऐसे डीनेचुरेंट मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं। साथ ही E20 में 80 प्रतिशत हिस्सा पेट्रोल का होने के कारण उसकी गंध प्रमुख रहती है। मंत्रालय ने टंकी में पानी जमा होने के दावे को भी खारिज करते हुए कहा कि आधुनिक वाहनों और ईंधन वितरण प्रणाली को इस तरह विकसित किया गया है कि पानी टैंक में प्रवेश न कर सके।

सरकार ने बताए E20 कार्यक्रम के फायदे

केंद्र सरकार के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से 2014-15 के बाद अब तक 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किसानों को किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आई है और कार्बन उत्सर्जन भी घटा है। मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया गया।

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