लखनऊ/06 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी डिजिटल और तकनीकी केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई। सरकार का लक्ष्य इस नीति के माध्यम से प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। इसके तहत ₹2 लाख करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित करने, 2 गीगावाट अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की योजना बनाई गई है।
उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 से क्या बदलेगा?
नई नीति बदलते डिजिटल परिदृश्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। सरकार का उद्देश्य केवल डेटा सेंटर स्थापित करना नहीं, बल्कि ऐसा तकनीकी इकोसिस्टम विकसित करना है जो भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि पिछली डेटा सेंटर नीति 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद नई तकनीकी आवश्यकताओं, ऊर्जा दक्षता और एआई आधारित कंप्यूटिंग को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 तैयार की गई है।
₹2 लाख करोड़ निवेश और 2 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता का लक्ष्य
सरकार ने इस नीति के तहत प्रदेश में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही 2 गीगावाट अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल हो सके।
सरकार का मानना है कि इससे क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं, फिनटेक, एआई और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों में बड़े निवेश का रास्ता खुलेगा।
बुंदेलखंड और पूर्वांचल को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन
नई नीति में क्षेत्रीय संतुलित विकास पर भी विशेष जोर दिया गया है। बुंदेलखंड और पूर्वांचल में डेटा सेंटर स्थापित करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन और विशेष सुविधाएं दी जाएंगी।
इसके अलावा आधुनिक टियर-3 और टियर-4 डेटा सेंटर, जीपीयू (GPU) आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई कंप्यूट सुविधाओं और पर्यावरण अनुकूल संचालन को बढ़ावा देने के लिए भी अलग से प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
ग्रीन और एआई-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा फोकस
उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 की सबसे बड़ी विशेषता इसका ग्रीन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित दृष्टिकोण है। नीति में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, पर्यावरण के अनुकूल संचालन और उच्च क्षमता वाले जीपीयू आधारित डेटा प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी गई है।
सरकार का उद्देश्य ऐसे डेटा सेंटर विकसित करना है जो भविष्य की एआई आधारित सेवाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था की बढ़ती मांग को पूरा कर सकें।
50 हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
इस नीति से प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, डेटा सेंटर परियोजनाओं के निर्माण और विकास के दौरान करीब 50 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
इसके अलावा परियोजनाओं के संचालन शुरू होने के बाद लगभग 7,500 लोगों के लिए दीर्घकालिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही डेटा सेंटर के आसपास आईटी और आईटीईएस (IT/ITeS) क्षेत्र की नई कंपनियों के आने से रोजगार का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
पिछली नीति की सफलता के बाद अगला कदम
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि जनवरी 2021 में लागू और नवंबर 2022 में संशोधित पिछली डेटा सेंटर नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। उसके तहत प्रदेश में लगभग ₹21,343 करोड़ का निवेश हुआ, जिससे 6 डेटा सेंटर पार्क और 40 मेगावाट से कम क्षमता वाली 2 डेटा सेंटर इकाइयों को मंजूरी मिली। इनमें से 7 प्रमुख परियोजनाएं पहले ही परिचालन शुरू कर चुकी हैं।
सरकार का मानना है कि उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए राज्य को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।








