लखनऊ/06 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और ग्रामीण विकास कार्यों को गति देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य वित्त आयोग के तहत यूपी पंचायतों को 14,988 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की गई है। सरकार ने तय किया है कि इस राशि का एक हिस्सा पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय, पंचायत कार्मिकों के वेतन और प्रशासनिक खर्चों पर भी व्यय किया जाएगा।
यूपी पंचायतों को 14,988 करोड़ रुपये देने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी
सोमवार को हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि के उपयोग से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में तीनों स्तर की पंचायतों के लिए 14,988.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण विकास और पंचायतों के संचालन को वित्तीय मजबूती मिलेगी।
सरकार के निर्णय के अनुसार, कुल आवंटित राशि का 10 प्रतिशत, यानी करीब 1,498 करोड़ रुपये, पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय, बैठकों के आयोजन, यात्रा एवं अन्य भत्तों के साथ-साथ पंचायत कार्मिकों के वेतन और प्रशासनिक जरूरतों पर खर्च किया जाएगा।
पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय पर खर्च होंगे 495.89 करोड़ रुपये
स्वीकृत बजट में से 495.89 करोड़ रुपये ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के मानदेय, बैठकों से जुड़े खर्च और विभिन्न भत्तों के भुगतान के लिए निर्धारित किए गए हैं। इससे पंचायत प्रतिनिधियों को नियमित वित्तीय सहायता मिलने के साथ स्थानीय प्रशासनिक कार्यों के संचालन में भी सुविधा होगी।
स्वच्छ भारत मिशन और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी मिलेगा बजट
कैबिनेट के निर्णय के मुताबिक 157.38 करोड़ रुपये स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और वित्त आयोग के तहत गठित वित्त प्रकोष्ठों में कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय एवं अन्य प्रशासनिक आवश्यकताओं पर खर्च किए जाएंगे।
यह राशि राज्य, मंडल, जिला और विकास खंड स्तर पर कार्यरत तकनीकी, प्रशासनिक और सिविल कार्मिकों के वेतन, मानदेय तथा कार्यालय संचालन से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में उपयोग होगी।
नियमानुसार होगा धनराशि का उपयोग
सरकार के अनुसार, प्रशासनिक और तकनीकी मदों पर होने वाला यह व्यय राज्य वित्त आयोग से प्राप्त कुल राशि का लगभग 1.05 प्रतिशत होगा। धनराशि का उपयोग पंचायती राज निदेशक के निर्देशों के अनुसार नियमानुसार और आवश्यकता के आधार पर किया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि इस वित्तीय प्रावधान से पंचायतों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, स्थानीय निकायों की प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को गति मिलेगी।









