नई दिल्ली/06 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अपने तीन देशों के विदेश दौरे के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे, जहां उनका स्वागत सामान्य राजनयिक औपचारिकताओं से अलग अंदाज में हुआ। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं एयरपोर्ट पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी करते नजर आए। किसी राष्ट्राध्यक्ष का इस तरह एयरपोर्ट पर पहुंचकर स्वागत करना कूटनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है और इसे दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों का संकेत माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में रणनीतिक गतिविधियां तेज हैं। यही वजह है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच होने वाली वार्ताओं पर चीन समेत कई देशों की नजर बनी हुई है।
भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मिलेगी नई गति
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को और मजबूत करना, समुद्री सहयोग को विस्तार देना तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला, समावेशी और सुरक्षित बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाना है।
दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर उच्चस्तरीय चर्चा होने की संभावना है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और इंडोनेशिया की रणनीतिक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है, इसलिए इस मुलाकात को क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किया संदेश
जकार्ता पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी यात्रा को लेकर संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में भारत और इंडोनेशिया ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक पहुंचाया था, जिसका लाभ दोनों देशों के नागरिकों को मिला है।
प्रधानमंत्री ने लिखा कि इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने पर चर्चा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे, जो भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।
प्रम्बानन मंदिर में दिखेगी साझा सांस्कृतिक विरासत की झलक
अपने इंडोनेशिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर भी जाएंगे। योग्याकार्ता शहर से लगभग 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित यह मंदिर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है।
यह दौरा केवल सांस्कृतिक महत्व का नहीं, बल्कि दोनों देशों की साझा सभ्यतागत विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का भी अवसर माना जा रहा है। प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे।
क्यों अहम मानी जा रही है यह यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा जनवरी 2025 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के बाद हो रही है, जब वह गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने थे। ऐसे में दोनों देशों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं को आगे बढ़ाने और नई साझेदारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार मार्ग और सामरिक सहयोग जैसे विषयों पर भारत और इंडोनेशिया की बढ़ती निकटता क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
इंडोनेशिया के बाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाएंगे पीएम मोदी
इंडोनेशिया यात्रा पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर मेलबर्न जाएंगे। इसके बाद अपने तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में वह न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के आमंत्रण पर ऑकलैंड पहुंचेंगे।
इस पूरे दौरे को भारत की विदेश नीति, इंडो-पैसिफिक रणनीति और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते कूटनीतिक सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।












