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CSJMU Convocation 2026: ‘IAS बनो या टीचर… पहले एक्सपर्ट मां बनो’, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान की चर्चा

On: July 10, 2026
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CSJMU Convocation 2026, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान की चर्चा
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कानपुर/10 जुलाई 2026: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के 41वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल का एक बयान चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे जीवन में आईएएस, शिक्षक या किसी भी बड़े पद तक जरूर पहुंचें, लेकिन उससे पहले एक ‘एक्सपर्ट मां’ बनने की तैयारी भी करें। उन्होंने कहा कि शादी के बाद रसोई में हर छोटी-बड़ी चीज के लिए यूट्यूब पर निर्भर रहना उचित नहीं है, इसलिए जीवन कौशल भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

शुक्रवार को कानपुर स्थित वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित CSJMU Convocation 2026 में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से मिलने वाली डिग्री मंजिल नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारियों की शुरुआत होती है। उन्होंने युवाओं से अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग देशहित में करने का आह्वान किया।

‘आत्मनिर्भर बनिए, लेकिन परिवार और जीवन की जिम्मेदारियां भी समझिए’

अपने संबोधन में आनंदीबेन पटेल ने कहा कि छात्राएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर जरूर बनें, लेकिन उन्हें पारिवारिक जीवन से जुड़े जरूरी कौशल भी सीखने चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज कई बेटियां शादी के बाद यूट्यूब देखकर खाना बनाना सीखती हैं, जबकि ऐसे बुनियादी जीवन कौशल पहले से आने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई के साथ किसी न किसी व्यावहारिक हुनर को सीखना जरूरी है, क्योंकि विकसित भारत के निर्माण में आत्मनिर्भर और दक्ष युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका होगी।

1.07 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिली डिग्री, बेटियों का रहा दबदबा

दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय ने 1,07,713 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की। इनमें 57,348 छात्राएं और 50,365 छात्र शामिल रहे। इस वर्ष 92 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई, जिनमें 50 छात्राएं और 42 छात्र शामिल हैं।

मेधावी विद्यार्थियों को दिए गए 96 पदकों में भी छात्राओं का दबदबा देखने को मिला। कुल 51 विद्यार्थियों को पदक मिले, जिनमें 42 छात्राएं और 9 छात्र शामिल रहे। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में छात्राओं की बढ़ती शैक्षणिक भागीदारी और उत्कृष्ट प्रदर्शन को दर्शाती है।

‘विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने की जगह नहीं’

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशालाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपने ज्ञान का लाभ पहुंचाने का आग्रह किया।

उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों में परिसर में छात्र संख्या में 131.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह कपड़े से पानी पूरी तरह निचोड़ा जाता है, उसी तरह हर विद्यार्थी को अपने ज्ञान और क्षमता का पूरा उपयोग देश सेवा में करना चाहिए।

प्रो. योगेश कुमार सिंह बोले- डिग्री नहीं, चरित्र असली पहचान

समारोह के मुख्य अतिथि, एआईसीटीई के चेयरमैन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश कुमार सिंह ने कहा कि डिग्रियां केवल शिक्षा पर हुए खर्च की रसीद होती हैं, जबकि वास्तविक शिक्षा व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार में दिखाई देती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से नेतृत्व क्षमता विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि उच्च शिक्षा या अनुभव के लिए विदेश जाएं तो वापस लौटकर भारत के विकास में योगदान दें। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं और विश्वविद्यालयों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।

उच्च शिक्षा मंत्री ने माता-पिता और गुरुजनों का जताया आभार

उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी की सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग और गुरुजनों का मार्गदर्शन होता है। उन्होंने युवाओं से अपनी प्रतिभा का उपयोग राष्ट्रहित में करने की अपील की।

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और निरंतर मेहनत ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचाती है।

नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा पर बढ़ रहा सीएसजेएमयू का फोकस

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि सीएसजेएमयू अब पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वैश्विक सहयोग और रोजगारपरक शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

समारोह के दौरान सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों के निःशुल्क टीकाकरण अभियान की शुरुआत भी की गई। विश्वविद्यालय की कई नई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ, जबकि उत्कृष्ट कार्य करने वाले चार शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

शिल्पाचार्य अंचल पी. बिजलानी को मिला डी.लिट सम्मान

दीक्षांत समारोह में कच्छ चर्म शिल्प के संरक्षण और विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिल्पाचार्य अंचल पी. बिजलानी को डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। साथ ही विद्यार्थियों की डिग्रियां और अंकपत्र डिजिटल हस्ताक्षर के साथ डिजीलॉकर पर भी जारी किए गए।

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