लखनऊ/09 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने समाज में बेटियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समाज में करुणा और संवेदनशीलता होती तो मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाएं नहीं होतीं। उन्होंने शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संस्कारित नागरिक तैयार करने की प्रक्रिया बताया। राज्यपाल ने यह बातें गुरुवार को लखनऊ स्थित भाषा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहीं।
समाज को बेटियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी निभानी होगी
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हाल ही में एक 13 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि समाज की सामूहिक संवेदनशीलता से भी जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समाज अपने दायित्वों का निर्वहन करे और लोग समय रहते हस्तक्षेप करें तो कई अपराधों को रोका जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे किशोरावस्था की बेटियों से खुलकर संवाद करें, ताकि वे किसी गलत संगत या परिस्थितियों का शिकार न बनें।
शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, संस्कार भी है
राज्यपाल ने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है, जो व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाए। उन्होंने एक प्रेरक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि एक नवजात बच्ची को उसके परिजनों ने झाड़ियों में छोड़ दिया था, लेकिन एक सब्जी विक्रेता ने उसे अपनाकर पढ़ाया-लिखाया और आज वही बेटी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अधिकारी है।
उन्होंने कहा कि समाज में एक ओर ऐसी अमानवीय घटनाएं होती हैं, तो दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं जो मानवता की मिसाल पेश करते हैं। शिक्षा का उद्देश्य इसी संवेदनशील समाज का निर्माण होना चाहिए।
71 एमओयू पर पूछा काम का हिसाब
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि बीते एक वर्ष में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ 71 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने पूछा कि इन समझौतों के तहत कितनी गतिविधियां संचालित हो रही हैं, कितने विद्यार्थी और शोधार्थी उनसे लाभान्वित हुए हैं और उनका वास्तविक परिणाम क्या रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय से इन सभी बिंदुओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने को कहा।
मां-बेटी संवाद को बताया समय की जरूरत
दीक्षांत समारोह के बाद राज्यपाल मां-बेटी सम्मेलन में भी शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में मां और बेटी के बीच खुला संवाद बेहद आवश्यक है। परिवार में विश्वास, अपनापन और संवाद जितना मजबूत होगा, बेटियां उतनी ही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकेंगी और कठिन परिस्थितियों का सामना कर पाएंगी।
राज्यपाल ने युवाओं से तीन संकल्प लेने की अपील की
अपने संबोधन में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से तीन महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आग्रह किया—
- भारतीय भाषाओं का सम्मान और संवर्धन करें।
- अपने ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के हित में करें।
- जीवन में सत्य, करुणा, संवेदना और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दें।
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी बोले- शिक्षा के साथ दीक्षा भी जरूरी
समारोह के मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि केवल शिक्षा प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा देता है, जबकि दीक्षा व्यक्ति के संस्कारों का निर्माण करती है और उसके लिए गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक होता है।
उन्होंने कहा कि केवल शिक्षित होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्यों का होना भी उतना ही जरूरी है। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने रिश्तों, सामाजिक मर्यादा और जीवन मूल्यों को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी।
उच्च शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों को बताया समाज का रोल मॉडल
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि पदक और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है और विद्यार्थियों को अपने आचरण से समाज के लिए प्रेरणा बनना चाहिए।
दीक्षांत समारोह में कुछ देर के लिए हुआ हंगामा
समारोह के दौरान उस समय कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब कुछ विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने पदक वितरण को लेकर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि यदि राज्यपाल के हाथों पदक नहीं दिलाना था, तो उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित करने का औचित्य क्या था।
विरोध बढ़ने पर उच्च शिक्षा मंत्री को अपना संबोधन बीच में रोकना पड़ा। इसके बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्वयं माइक संभालते हुए सभी से शांत रहने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि व्यवधान जारी रहा तो कार्यक्रम समाप्त करना पड़ेगा। इसके बाद पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के हस्तक्षेप से स्थिति सामान्य हुई और समारोह आगे बढ़ सका।











