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HBTU दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सख्त, इंफ्रास्ट्रक्चर की खामियों पर मंच से अधिकारियों को लगाई फटकार

On: July 10, 2026
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HBTU दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सख्त
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कानपुर, 10 जुलाई 2026: हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (HBTU) के दीक्षांत समारोह में उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने मंच से ही विश्वविद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और बजट के उपयोग पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान केवल आधुनिक इमारतों से नहीं, बल्कि उनकी उपयोगिता, सुरक्षा और दूरदर्शी योजना से होती है।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कई उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में तकनीकी समझ, व्यावहारिक सोच और गुणवत्ता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता के धन का उपयोग पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए।

ब्लैकबोर्ड की ऊंचाई पर उठाए सवाल, कहा- डिजाइन उपयोगी होनी चाहिए

HBTU दीक्षांत समारोह में बोलते हुए आनंदीबेन पटेल ने कक्षाओं की डिजाइनिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि कई संस्थानों में ब्लैकबोर्ड इतनी ऊंचाई पर लगाए जाते हैं कि उनका बड़ा हिस्सा उपयोग में ही नहीं आ पाता।

उन्होंने बताया कि एक निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वयं एक डिजाइनर से ब्लैकबोर्ड पर ऊपर तक लिखने के लिए कहा, लेकिन वह पूरी ऊंचाई तक नहीं लिख सका। इसके बाद उन्होंने निर्देश दिया कि कक्षाओं में शिक्षकों के लिए उचित प्लेटफॉर्म की व्यवस्था की जाए, ताकि पूरी ब्लैकबोर्ड का प्रभावी उपयोग हो सके।

छात्राओं की सुरक्षा से समझौता नहीं, हॉस्टल की दीवार पर जताई नाराजगी

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर के निरीक्षण का जिक्र करते हुए छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि लड़कियों के हॉस्टल के पीछे कृषि भूमि होने के बावजूद वहां केवल लगभग तीन फीट ऊंची सुरक्षा दीवार बनाई जा रही थी।

उन्होंने इसे सुरक्षा मानकों के अनुरूप न बताते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि छात्राओं की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रशासनिक भवन में लाइब्रेरी बनाने पर भी उठाए सवाल

अपने संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालय के नए प्रशासनिक भवन की योजना पर भी सवाल उठाए। राज्यपाल ने कहा कि तीन मंजिला भवन की ऊपरी मंजिल पर लाइब्रेरी बनाई जा रही थी, जबकि लाइब्रेरी ऐसी जगह होनी चाहिए जहां विद्यार्थी नियमित रूप से अध्ययन और शोध कार्य करते हों।

उनका कहना था कि भवनों की योजना केवल निर्माण पूरा करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।

हॉस्टल के वेंटिलेशन और डिजाइन पर भी जताई चिंता

आनंदीबेन पटेल ने इंटरनेशनल हॉस्टल की डिजाइन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां खिड़कियां इतनी ऊंचाई पर बनाई गई हैं कि उन्हें खोलने के लिए टेबल का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा कमरों में क्रॉस-वेंटिलेशन की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।

उन्होंने कहा कि ऐसे डिजाइन भविष्य में विद्यार्थियों के लिए असुविधा का कारण बनते हैं और निर्माण के समय ही इन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

बजट खर्च करना ही उपलब्धि नहीं, बेहतर योजना जरूरी

राज्यपाल ने अधिकारियों की कार्यशैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार निर्माण कार्यों में पहले भवन बना दिए जाते हैं और बाद में फायर सेफ्टी, एयर कंडीशनिंग या वायरिंग जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं के लिए तोड़फोड़ करनी पड़ती है। इससे सरकारी धन और समय दोनों की बर्बादी होती है।

उन्होंने कहा कि केवल बजट का शत-प्रतिशत उपयोग कर देना सफलता का पैमाना नहीं है। सही मायने में उपलब्धि तब है, जब योजनाएं शुरुआत से ही दूरदर्शिता और व्यावहारिक सोच के साथ तैयार की जाएं।

भविष्य के अधिकारियों को पारदर्शिता और जिम्मेदारी का संदेश

दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज के छात्र ही कल देश के प्रशासनिक, तकनीकी और नीति निर्धारण से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचेंगे।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने कार्यकाल में पारदर्शिता, समयबद्धता और ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उनका कहना था कि हर अधिकारी का पहला दायित्व आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए।

माता-पिता के संघर्ष को याद कर भावुक हुईं राज्यपाल

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से माता-पिता के संघर्ष को कभी न भूलने की अपील की। उन्होंने कहा कि अनेक परिवार कठिन परिस्थितियों में मेहनत करके अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाते हैं।

उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने माता-पिता के परिश्रम और त्याग का सम्मान करें तथा जीवन में ऐसी जिम्मेदारियां निभाएं, जिससे परिवार, समाज और देश का नाम रोशन हो। साथ ही उन्होंने अधिकारियों से भी सरकारी संसाधनों और जनता के धन के प्रति संवेदनशील रहने की सीख दी।

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