लखनऊ/10 जुलाई 2026: लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की जान लेने वाली अलीगंज सेक्टर-डी स्थित विवादित इमारत को अब ध्वस्त किया जाएगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शुक्रवार को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया। लगातार तीन दिनों तक चली सुनवाई के बाद प्राधिकरण ने भवन को अवैध मानते हुए उसे गिराने का फैसला लिया है। हालांकि भवन स्वामी को पहले स्वयं अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिनों का अंतिम अवसर दिया गया है। यदि तय समय में कार्रवाई नहीं होती है तो एलडीए खुद ध्वस्तीकरण करेगा और पूरा खर्च भवन मालिक से ही वसूला जाएगा।
लखनऊ अग्निकांड के बाद एलडीए की बड़ी कार्रवाई, 15 दिन में हटाना होगा अवैध निर्माण
22 जून को अलीगंज सेक्टर-डी स्थित एक एनिमेशन सेंटर में भीषण आग लगने से 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। अधिकारियों ने पाया कि भवन में फायर सेफ्टी के जरूरी इंतजाम नहीं थे, निर्धारित सेटबैक का पालन नहीं किया गया था और निर्माण भी स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किया गया था।
जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि भवन का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत कराया गया था, जबकि उसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इसी आधार पर एलडीए ने 23 जून को भवन मालिक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
तीन दिन चली सुनवाई, फिर आया ध्वस्तीकरण का आदेश
इस मामले की पहली सुनवाई 7 जुलाई को एलडीए के विहित प्राधिकारी अतुल कुमार की अदालत में हुई। भवन मालिक की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, जिस पर एक दिन की मोहलत दी गई।
8 जुलाई को दोबारा सुनवाई हुई। इस बार जवाब दाखिल कर बहस के लिए समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए अगली तारीख तय की।
9 जुलाई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया गया। आखिरकार 10 जुलाई को एलडीए ने भवन को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया। आदेश की प्रति एलडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर भवन पर चस्पा भी कर दी।
भवन मालिक ने खुद तोड़ने की जताई थी इच्छा
सुनवाई के दौरान भवन मालिक के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी थी कि भवन में जो भी हिस्सा अवैध है, उसे मालिक अपने खर्च पर स्वयं गिराने को तैयार है। साथ ही नई भवन निर्माण नीति के तहत शमन मानचित्र (Compounding Plan) स्वीकृत करने और कम से कम एक महीने का समय देने की मांग भी की गई थी।
हालांकि एलडीए ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अब जारी आदेश के अनुसार भवन स्वामी को केवल 15 दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में अवैध निर्माण नहीं हटाया गया तो प्राधिकरण अपने स्तर पर ध्वस्तीकरण करेगा और पूरी लागत भी मालिक से वसूलेगा।
जांच में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं
हादसे की जांच के दौरान भवन निर्माण से जुड़े कई बड़े उल्लंघन उजागर हुए। रिपोर्ट के अनुसार—
- भवन का स्वीकृत मानचित्र केवल बेसमेंट और दो मंजिल तक का था।
- इसके बावजूद तीसरी मंजिल का निर्माण पूरी तरह अवैध रूप से किया गया।
- स्वीकृति केवल 20 वर्गमीटर बेसमेंट की थी, जबकि लगभग 134 वर्गमीटर क्षेत्र में बेसमेंट बनाया गया।
- अनिवार्य सेटबैक नहीं छोड़ा गया, जिससे आपात स्थिति में निकासी प्रभावित हुई।
- भवन के लगभग हर तल पर स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण पाया गया।
- फायर सेफ्टी के बुनियादी मानकों का भी पालन नहीं किया गया था।
इन अनियमितताओं को हादसे की गंभीरता बढ़ाने वाला प्रमुख कारण माना गया।
पूरे मामले की समय-रेखा
- 23 जून 2026: एलडीए ने अवैध निर्माण को लेकर भवन मालिक को नोटिस जारी किया।
- 7 जुलाई 2026: पहली सुनवाई, जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया।
- 8 जुलाई 2026: दूसरी सुनवाई, बहस के लिए फिर एक दिन की मोहलत मिली।
- 9 जुलाई 2026: दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा गया।
- 10 जुलाई 2026: एलडीए ने भवन ध्वस्तीकरण का अंतिम आदेश जारी किया।
इस कार्रवाई को लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शहर में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कदम उठाए जाएंगे।










