नई दिल्ली/15 जुलाई 2026: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले लोकसभा सचिवालय ने सांसदों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का मकसद संसद परिसर में अनुशासन बनाए रखना, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और सदन की कार्यवाही को बिना किसी व्यवधान के संचालित करना है। खास बात यह है कि पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार आपत्तिजनक पोस्टरों और तस्वीरों को लेकर भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है।
मानसून सत्र 2026: AI पोस्टर से लेकर धरना-प्रदर्शन तक, सांसदों के लिए क्या हैं नए नियम?
लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी अलग-अलग संसदीय बुलेटिन में कहा गया है कि हाल के समय में कुछ स्थानों पर AI की मदद से तैयार आपत्तिजनक चित्र, फोटो, नारे और पोस्टर सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ऐसे में सांसदों से अपील की गई है कि वे संसद परिसर के भीतर इस तरह की किसी भी सामग्री का उपयोग न करें और न ही ऐसी गतिविधियों का हिस्सा बनें।
सचिवालय ने स्पष्ट किया कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
संसद के गेट पर प्रदर्शन से क्यों किया गया मना?
लोकसभा सचिवालय ने एक अन्य बुलेटिन में सांसदों से संसद भवन के प्रवेश द्वारों के सामने धरना, प्रदर्शन या विरोध कार्यक्रम आयोजित नहीं करने का अनुरोध किया है।
निर्देशों के अनुसार, प्रवेश द्वारों पर प्रदर्शन होने से सांसदों की आवाजाही प्रभावित होती है और सदन की कार्यवाही के दौरान आवागमन में गंभीर बाधा उत्पन्न होती है। इसी वजह से लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशों की धारा 124A(2) का पालन करने को कहा गया है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष अपील
सचिवालय ने कहा कि संसद भवन के सभी गेट हर समय बाधारहित और खुले रहने चाहिए ताकि सुरक्षा एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभा सकें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो।
इसी उद्देश्य से सांसदों से सहयोग की अपील करते हुए कहा गया है कि वे सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि से बचें।
धरना, हड़ताल और धार्मिक कार्यक्रमों पर भी रोक
जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संसद परिसर का उपयोग धरना, प्रदर्शन, हड़ताल, उपवास या किसी धार्मिक आयोजन के लिए नहीं किया जा सकता।
लोकसभा सचिवालय ने सांसदों से कहा है कि संसद परिसर केवल संसदीय कार्यों के संचालन के लिए है और इसकी गरिमा तथा निष्पक्ष वातावरण बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
संसद परिसर में किन चीजों को लाने पर रोक?
एक अन्य बुलेटिन के अनुसार संसद परिसर के भीतर ऐसे किसी भी सामान की अनुमति नहीं होगी, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। प्रतिबंधित वस्तुओं में शामिल हैं—
- बैनर और तख्तियां
- पोस्टर
- हथियार
- लाठी, डंडे और भाले
- तलवार या अन्य आक्रामक वस्तुएं
सचिवालय ने कहा कि संसद परिसर के भीतर सभी मार्ग और खुले क्षेत्र सांसदों की निर्बाध आवाजाही के लिए सुरक्षित और खाली रहने चाहिए।
पहले भी विरोध के कारण बाधित होती रही है कार्यवाही
संसद के पिछले कई सत्रों में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन, नारेबाजी और तख्तियां दिखाने के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई है। कई अवसरों पर सदन की बैठकें स्थगित करनी पड़ीं और विधायी कामकाज प्रभावित हुआ।
पिछले बजट सत्र के दौरान भी निलंबित किए गए कुछ सांसदों ने संसद परिसर के एक प्रवेश द्वार के पास कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था। इसी पृष्ठभूमि में इस बार मानसून सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा सचिवालय ने नियमों को दोबारा स्पष्ट करते हुए सभी सांसदों से उनका पालन करने की अपील की है।
संसद की गरिमा और सुचारु कार्यवाही पर जोर
लोकसभा सचिवालय का मानना है कि संसद लोकतांत्रिक विमर्श का सर्वोच्च मंच है। ऐसे में विरोध दर्ज कराने का अधिकार अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन वह संसदीय नियमों और सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में ही होना चाहिए। नए निर्देशों का उद्देश्य भी यही है कि मानसून सत्र के दौरान सदन का कामकाज बिना अनावश्यक व्यवधान के सुचारु रूप से चल सके।












