नई दिल्ली/15 जुलाई 2026: भारत के रेलवे इतिहास में 17 जुलाई 2026 एक नई तकनीकी छलांग का गवाह बनने जा रहा है। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा से भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इससे पहले बुधवार को प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस अत्याधुनिक ट्रेन की तस्वीरें साझा कर देशवासियों के साथ इस उपलब्धि की झलक दिखाई। यह सिर्फ एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन की दिशा में भारत के बढ़ते कदम का प्रतीक भी मानी जा रही है।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: हरित भविष्य की ओर भारतीय रेलवे का बड़ा कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “भारत की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन हरियाणा से चलने के लिए तैयार है।” तस्वीरों में आधुनिक तकनीक से लैस ट्रेन के साथ भारतीय रेलवे की बदलती तस्वीर भी नजर आती है। यह परियोजना रेलवे के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
हाइड्रोजन ईंधन पर आधारित यह ट्रेन संचालन के दौरान कार्बन उत्सर्जन नहीं करेगी। पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में यह पर्यावरण के लिए कहीं अधिक अनुकूल मानी जा रही है और भविष्य में स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
17 जुलाई को हरियाणा से होगी शुरुआत
भारतीय रेलवे की यह ऐतिहासिक ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड से अपनी यात्रा शुरू करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इसे 17 जुलाई को हरी झंडी दिखाएंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का उद्देश्य उन रेल मार्गों पर भी स्वच्छ तकनीक उपलब्ध कराना है, जहां विद्युतीकरण करना कठिन या अत्यधिक खर्चीला है।
दुनिया की सबसे लंबी ब्रॉड गेज हाइड्रोजन ट्रेन
इस ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी लंबाई भी शामिल है। इसमें कुल 10 कोच लगाए गए हैं और इसे ब्रॉड गेज पर चलने वाली दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन बताया जा रहा है।
ट्रेन में कुल 2400 किलोवाट क्षमता का पावर सिस्टम लगाया गया है। इसके लिए दो ड्राइविंग पावर कार (DPC) तैयार की गई हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 1200 किलोवाट है। यह व्यवस्था ट्रेन को बेहतर प्रदर्शन और संतुलित ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
जींद में तैयार हुई विशेष रिफ्यूलिंग सुविधा
हाइड्रोजन ईंधन के सुरक्षित उपयोग के लिए हरियाणा के जींद में विशेष रिफ्यूलिंग और स्टोरेज यूनिट स्थापित की गई है। यहां कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस का सुरक्षित भंडारण किया जाएगा और ट्रेन में ईंधन भरा जाएगा। यह सुविधा भारतीय रेलवे की नई ऊर्जा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक
रेलवे ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेन में आधुनिक निगरानी प्रणाली लगाई है। इसमें हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर और फ्लेम डिटेक्टर जैसे उन्नत सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं, जो चौबीसों घंटे किसी भी संभावित खतरे पर नजर रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत अलर्ट जारी करेंगे।
90 किलोमीटर ट्रैक पर सफल परीक्षण
रेलवे अधिकारियों के अनुसार जींद-सोनीपत के लगभग 90 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर ट्रेन का सफल परीक्षण किया जा चुका है। ट्रायल के दौरान ट्रेन ने शुरुआती चरण में 75 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से संचालन किया। परीक्षण के सकारात्मक परिणामों के बाद इसे नियमित सेवा के लिए तैयार किया गया है।
भारत के लिए क्यों है यह उपलब्धि खास?
हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक अभी दुनिया के चुनिंदा देशों में ही उपयोग की जा रही है। ऐसे में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारतीय रेलवे को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने वाला कदम माना जा रहा है। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में पर्यावरण-अनुकूल रेल परिवहन को नई गति मिलने की उम्मीद है। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में देश के कई अन्य मार्गों पर भी ऐसी ट्रेनें देखने को मिल सकती हैं।













