नई दिल्ली/20 जुलाई 2026। भारत में डेंगू से बचाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पहली बार QDENGA वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। जापान की दवा कंपनी टाकेदा फार्मास्युटिकल्स द्वारा विकसित इस वैक्सीन को भारतीय दवा नियामक की स्वीकृति मिली है। ऐसे समय में यह मंजूरी आई है, जब देश में पिछले दो दशकों के दौरान डेंगू के मामलों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
कंपनी के अनुसार, दुनिया में डेंगू के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत में सामने आता है। ऐसे में इस वैक्सीन को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
क्या है डेंगू और क्यों बढ़ रही है चिंता?
डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित एडीज (Aedes) मच्छर के काटने से फैलता है। यह बीमारी मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक देखी जाती है। अधिकांश संक्रमित लोगों में हल्के या बिल्कुल भी लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप लेकर जानलेवा भी हो सकता है।
डेंगू वायरस के चार अलग-अलग प्रकार (सीरोटाइप) होते हैं। एक प्रकार से संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति भविष्य में दूसरे प्रकार के वायरस से संक्रमित हो सकता है। दूसरी बार संक्रमण होने पर गंभीर डेंगू का खतरा बढ़ जाता है।
डेंगू के प्रमुख लक्षण
डेंगू के लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद दिखाई देते हैं और 2 से 7 दिन तक रह सकते हैं। इसके सामान्य लक्षण हैं—
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- आंखों के पीछे दर्द
- मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
- मतली और उल्टी
- शरीर पर लाल चकत्ते
- सूजी हुई ग्रंथियां
यदि मरीज में लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द, सांस लेने में तकलीफ, नाक या मसूड़ों से खून आना, मल या उल्टी में खून, अत्यधिक कमजोरी या ठंडी त्वचा जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे गंभीर डेंगू माना जाता है और तत्काल अस्पताल में इलाज कराना चाहिए।
भारत में डेंगू की स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत डेंगू से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। अनुमान है कि देश में 75 से 80 प्रतिशत संक्रमण ऐसे होते हैं, जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन संक्रमित व्यक्ति मच्छरों के माध्यम से वायरस के प्रसार में भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में गंभीर डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा अधिक रहता है, जबकि वयस्कों में संक्रमण बढ़ने पर डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थितियां विकसित हो सकती हैं।
क्या है QDENGA वैक्सीन?
QDENGA वैक्सीन डेंगू से बचाव के लिए विकसित एक आधुनिक वैक्सीन है। यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (EMA) के अनुसार इसे 4 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चों, किशोरों और वयस्कों को लगाया जा सकता है।
इस वैक्सीन में डेंगू वायरस के चारों प्रकारों के कमजोर (attenuated) रूप शामिल किए गए हैं। ये शरीर में बीमारी पैदा नहीं करते, बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस के खिलाफ सुरक्षा विकसित करने के लिए तैयार करते हैं।
QDENGA वैक्सीन कैसे काम करती है?
वैक्सीन लगने के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर वायरस को पहचानकर उसके खिलाफ एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करती है। यदि बाद में व्यक्ति वास्तविक डेंगू वायरस के संपर्क में आता है, तो शरीर पहले से मौजूद प्रतिरक्षा के कारण वायरस से तेजी से मुकाबला करने की कोशिश करता है।
इस वैक्सीन की खास बात यह है कि इसे लगवाने के लिए पहले डेंगू होना आवश्यक नहीं है। कंपनी के अनुसार, टीकाकरण से पहले किसी विशेष जांच की भी जरूरत नहीं होती।
किन लोगों को लगाई जाएगी QDENGA वैक्सीन?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह वैक्सीन—
- 4 वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों को दी जा सकती है।
- किशोरों और वयस्कों के लिए भी उपयुक्त है।
- पहले डेंगू हो चुका है या नहीं, दोनों परिस्थितियों में उपयोग की जा सकती है।
हालांकि भारत में इसे किस आयु वर्ग, किन क्षेत्रों या किस टीकाकरण कार्यक्रम के तहत उपलब्ध कराया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और स्वास्थ्य प्राधिकरणों की नीति के अनुसार होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मंजूरी?
भारत में हर वर्ष मानसून के दौरान डेंगू के मामलों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अब तक इस बीमारी से बचाव के लिए मच्छरों पर नियंत्रण, साफ-सफाई और समय पर इलाज ही प्रमुख उपाय थे। QDENGA वैक्सीन की मंजूरी से डेंगू की रोकथाम को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण के साथ-साथ मच्छरों की रोकथाम, साफ पानी जमा न होने देना और शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना अभी भी डेंगू नियंत्रण की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतियों में शामिल रहेगा।











