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एविएशन सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, नई एयरलाइन कंपनियों की एंट्री होगी आसान; जानिए सरकार का पूरा प्लान

On: July 23, 2026
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एविएशन सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, नई एयरलाइन कंपनियों की एंट्री होगी आसान
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देश के विमानन क्षेत्र में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। केंद्र सरकार नई एयरलाइन कंपनियों की एंट्री को आसान बनाने के लिए नागरिक उड्डयन से जुड़े नियमों की व्यापक समीक्षा कर रही है। सरकार का उद्देश्य घरेलू विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, निजी निवेश को आकर्षित करना और यात्रियों को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है।

सूत्रों के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय लाइसेंस प्रक्रिया, पायलटों की उपलब्धता, स्वामित्व संबंधी नियमों और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़े प्रावधानों में संशोधन की संभावनाओं पर काम कर रहा है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों और वित्तीय पात्रता से जुड़े नियमों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

0/20 नियम में भी हो सकता है बदलाव

सरकार जिन अहम प्रावधानों की समीक्षा कर रही है, उनमें 0/20 नियम भी शामिल है। मौजूदा व्यवस्था के तहत किसी एयरलाइन को अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने से पहले घरेलू नेटवर्क पर कम से कम 20 विमान या अपने कुल बेड़े का 20 प्रतिशत (जो भी अधिक हो) संचालित करना अनिवार्य है।

सरकार का मानना है कि यह नियम नई एयरलाइन कंपनियों के विस्तार की राह में बड़ी चुनौती बनता है। ऐसे में इस प्रावधान को अधिक व्यावहारिक बनाने पर विचार किया जा रहा है ताकि नए निवेशकों के लिए बाजार में प्रवेश आसान हो सके।

क्यों महसूस हुई बदलाव की जरूरत?

घरेलू विमानन बाजार में इस समय सीमित कंपनियों का दबदबा है। उपलब्ध उद्योग आंकड़ों के अनुसार, दो प्रमुख एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

पिछले वर्ष दिसंबर में एक प्रमुख एयरलाइन की हजारों उड़ानें प्रभावित होने से देशभर के यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा था। सरकार का मानना है कि यदि बाजार में अधिक एयरलाइन कंपनियां सक्रिय होंगी तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, सेवाओं में सुधार होगा और किसी एक कंपनी पर अत्यधिक निर्भरता भी कम होगी।

एयरपोर्ट ऑपरेटरों को भी मिल सकती है बड़ी राहत

मौजूदा नियमों के तहत एयरपोर्ट संचालित करने वाली कंपनियां एयरलाइन व्यवसाय में प्रवेश नहीं कर सकतीं। इसी तरह एयरलाइनों को भी एयरपोर्ट के स्वामित्व या संचालन में सीमित हिस्सेदारी रखने की अनुमति है।

इसी कारण अडानी एयरपोर्ट्स और जीएमआर एयरपोर्ट्स जैसी निजी कंपनियां, जो देश के प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करती हैं, एयरलाइन शुरू नहीं कर सकतीं।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस प्रतिबंध में भी सीमित ढील देने पर विचार कर रही है। यदि प्रस्ताव लागू होता है तो एक ही कंपनी को एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार दोनों में आने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय निगरानी और सुरक्षा उपाय पहले की तरह लागू रहेंगे।

कई एयरपोर्ट पहले से निजी कंपनियों के पास

अडानी समूह फिलहाल मुंबई एयरपोर्ट सहित देश के आठ हवाई अड्डों का संचालन करता है। इसके अलावा समूह पायलट प्रशिक्षण, विमान रखरखाव (एमआरओ) और ग्राउंड हैंडलिंग जैसी विमानन सेवाओं में भी सक्रिय है।

वहीं, जीएमआर ग्रुप दिल्ली एयरपोर्ट सहित चार प्रमुख एयरपोर्ट का संचालन कर रहा है। नियमों में बदलाव होने की स्थिति में ऐसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर समूह भविष्य में एयरलाइन कारोबार में भी कदम रख सकते हैं।

नियमों की समीक्षा अंतिम चरण में

सूत्रों के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय प्रस्तावित सुधारों की प्रारंभिक समीक्षा पूरी कर चुका है। अब एयरक्राफ्ट रूल्स, डीजीसीए (DGCA) के नियमों और अन्य नीतिगत प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।

सरकार इन सुधारों को मौजूदा नियमों में संशोधन, डीजीसीए के दिशा-निर्देशों में बदलाव और आवश्यक होने पर नई नीतियों के माध्यम से लागू करने की तैयारी कर रही है। अंतिम निर्णय से पहले सभी संबंधित पक्षों से भी आवश्यक विचार-विमर्श किया जाएगा।

क्या होगा यात्रियों पर असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई एयरलाइन कंपनियों की एंट्री आसान होती है तो आने वाले वर्षों में घरेलू विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी। इससे यात्रियों को अधिक उड़ान विकल्प, बेहतर सेवाएं और प्रतिस्पर्धी किराए मिलने की संभावना बढ़ सकती है। साथ ही विमानन क्षेत्र में निजी निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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