नई दिल्ली/30 जुलाई 2026: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना बांग्लादेश वापसी को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। भारत में रह रहीं शेख हसीना ने बुधवार को कहा कि वह दिसंबर 2026 तक हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी, चाहे उन्हें गिरफ्तारी, जेल या मौत जैसी किसी भी स्थिति का सामना क्यों न करना पड़े। उन्होंने कहा कि अपने देश की जनता की पुकार को वह अनदेखा नहीं कर सकतीं और लौटने के बाद जो भी परिस्थितियां बनेंगी, उनका सामना करने के लिए तैयार हैं।
अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद से शेख हसीना नई दिल्ली में रह रही हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके खिलाफ बांग्लादेश में कई कानूनी मामले लंबित हैं।
‘मेरी हत्या हो सकती है, फिर भी लौटूंगी’
समाचार एजेंसी AFP को ई-मेल के जरिए दिए जवाब में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी वापसी के संभावित परिणामों का पूरा अंदाजा है।
उन्होंने कहा, “मेरी हत्या हो सकती है। मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है। मुझे जेल भेजा जा सकता है। फिर भी मैं अपने देश लौटना चाहती हूं, क्योंकि मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं। मुझे अपनी किस्मत का एहसास है।”
इससे पहले समाचार एजेंसी Reuters से बातचीत में भी उन्होंने कहा था कि वह और उनके राजनीतिक सहयोगी निर्वासन से वापस लौटेंगे और बांग्लादेश की अदालतों में कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उनकी मृत्यु होती है तो वह अपने ही देश की मिट्टी पर हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं।
2024 के आंदोलन के बाद छोड़ना पड़ा था देश
शेख हसीना के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत 2024 में छात्र आंदोलन के बाद हुई। सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन बाद में व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल गया।
प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर देशभर में तनाव बढ़ा। लंबे समय तक चले आंदोलन में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं।
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने सुनाई थी सजा
सरकार बदलने के बाद बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में शेख हसीना और उनके कई पूर्व सहयोगियों के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों में कार्रवाई शुरू की।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्रिब्यूनल ने उनकी अनुपस्थिति में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उनके खिलाफ कई अन्य कानूनी मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिनका सामना करने के लिए उन्होंने अब बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई है।
सरकार बदलने के बाद बदला राजनीतिक परिदृश्य
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। उनकी पार्टी अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार किया गया या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
बाद में हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने जीत दर्ज की और तारिक रहमान ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
ऐसे में शेख हसीना बांग्लादेश वापसी का ऐलान दक्षिण एशिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि उनकी संभावित वापसी के बाद बांग्लादेश की कानूनी और राजनीतिक परिस्थितियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।













