लखनऊ (05 अगस्त 2026)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में लगातार दूसरे दिन हुए हंगामे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है और सदन की कार्यवाही बाधित कर उसने जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का अवसर छीन लिया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आचरण को “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि यही उसका वास्तविक लोकतंत्र विरोधी चेहरा है।
बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही लगातार हंगामे के बीच दोपहर करीब डेढ़ बजे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद आयोजित प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई।
59 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अनुपूरक बजट का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार प्रदेश के विकास और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों के साथ 59 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट लेकर आई थी। उनका कहना था कि इस बजट के माध्यम से युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों के लिए नई योजनाओं तथा विकास कार्यक्रमों पर चर्चा होनी थी, लेकिन विपक्ष के विरोध और हंगामे के कारण सदन में इस पर सार्थक बहस नहीं हो सकी।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नकारात्मक रवैये ने जनहित से जुड़े विषयों को पीछे धकेल दिया।
पेंशन और मानदेय बढ़ाने के प्रस्तावों का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने विभिन्न वर्गों के हित में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किए थे। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, रसोइयों, ग्राम चौकीदारों सहित कई वर्गों के मानदेय बढ़ाने पर चर्चा प्रस्तावित थी।
इसके अलावा महिला पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन से जुड़े विषयों पर भी सदन में विचार होना था। मुख्यमंत्री के अनुसार, विपक्ष के हंगामे के कारण इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा संभव नहीं हो सकी।
हालांकि उन्होंने कहा कि विधानसभा ने अनुपूरक बजट पारित कर दिया है और सरकार जल्द ही इन योजनाओं से जुड़े निर्णयों को आगे बढ़ाएगी।
विपक्ष के रवैये पर जताई नाराजगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सदन की कार्यवाही को बाधित करना प्रदेश के युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चर्चा और संवाद सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं, लेकिन विपक्ष ने बहस के बजाय व्यवधान का रास्ता अपनाया।
उनका कहना था कि जनता के मुद्दों पर चर्चा से बचना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
मंगलवार को भी विपक्ष पर साधा था निशाना
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि एक दिन पहले भी उन्होंने विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान विपक्ष की आलोचना की थी। उस समय उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा था कि जांच में साधु-संतों की संलिप्तता सामने नहीं आई है, फिर भी विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़कर अयोध्या, सनातन परंपरा और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष की पीठ का सम्मान नहीं किया और प्लेकार्ड लहराकर सदन की कार्यवाही बाधित करने की कोशिश की।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सत्र समाप्त
मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। एक ओर सरकार ने विपक्ष पर जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया, वहीं विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करता रहा। इसी राजनीतिक टकराव के बीच बुधवार को सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।









