लखनऊ (Wed, 05 Aug 2026)। यूपी विधानसभा मानसून सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे टकराव के कारण तय समय से पहले समाप्त हो गया। लगातार तीन दिनों तक चले हंगामे की वजह से सदन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी। इसी बीच सरकार ने 59,019.54 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट बिना बहस के ध्वनिमत से पारित करा लिया। साथ ही संभल न्यायिक जांच आयोग और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी गई, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते इन पर भी चर्चा नहीं हो सकी।
हंगामे के बीच पारित हुआ अनुपूरक बजट
बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया। विपक्ष के विधायक अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंचकर नारेबाजी करने लगे, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
दोपहर में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी स्थिति नहीं बदली। विपक्ष के लगातार विरोध के बीच वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने 59,019.54 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को पारित करने का प्रस्ताव रखा। सदन ने इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। हंगामे के कारण बजट पर प्रस्तावित चर्चा नहीं हो सकी।
चढ़ावा चोरी और पेपर लीक समेत कई मुद्दों पर विपक्ष का प्रदर्शन
यूपी विधानसभा मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने चढ़ावा चोरी प्रकरण, पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि विपक्ष चढ़ावा चोरी के मामले पर सदन की अन्य कार्यवाही रोककर चर्चा कराना चाहता था।
वहीं सपा विधायक डॉ. संग्राम सिंह ने सदन में कहा कि लोकतंत्र लोक और लाज से चलता है तथा विपक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि सदन का समय विपक्ष के हंगामे की वजह से ही खराब हुआ है।
सचिन यादव के निलंबन का मुद्दा भी उठा
कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने सपा विधायक सचिन यादव के निलंबन का मुद्दा उठाते हुए अध्यक्ष से उस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष अपने आसन से उठकर चले गए और कार्यवाही का संचालन अधिष्ठाता मंजू शिवाच ने संभाला।
इस दौरान विपक्षी सदस्य फिर अध्यक्षीय आसन के सामने पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। बढ़ते हंगामे को देखते हुए संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना के आग्रह पर सदन की कार्यवाही पहले आधे घंटे और फिर दो बार आगे के लिए स्थगित करनी पड़ी।
संभल आयोग और सीएजी रिपोर्ट भी सदन में पेश
सरकार ने कार्यवाही के दौरान संभल हिंसा प्रकरण से संबंधित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट भी विधानसभा के पटल पर रखी।
हालांकि विपक्ष के विरोध और शोर-शराबे के चलते इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर भी कोई चर्चा नहीं हो सकी और सरकार ने अपनी निर्धारित विधायी एवं वित्तीय कार्यवाही पूरी कर ली।
तय समय से पहले समाप्त हुआ मानसून सत्र
गौरतलब है कि मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन के दौरान हुए हंगामे और सपा विधायक सचिन यादव के निलंबन के बाद सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया था। बुधवार को भी विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा, जबकि सरकार ने सभी आवश्यक कार्य पूरे कर लिए।
अनुपूरक बजट पारित होने के बाद वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। मूल कार्यक्रम के अनुसार यूपी विधानसभा मानसून सत्र 6 अगस्त तक चलना था, लेकिन लगातार जारी गतिरोध और हंगामे के चलते इसे एक दिन पहले ही समाप्त कर दिया गया।









