नई दिल्ली|08 जून 2026। केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को गरीब कल्याण योजनाओं की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार की विभिन्न योजनाओं ने करोड़ों लोगों को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है। वहीं, यमुना सफाई अभियान को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को साझा रणनीति के तहत काम करने के निर्देश दिए।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में अमित शाह ने कहा कि “गरीब कल्याण” मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, जन-धन योजना, मुद्रा ऋण योजना, पीएम स्वनिधि और अन्न योजना जैसी पहलों ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक वित्तीय सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शाह के अनुसार, इन योजनाओं के माध्यम से करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं, आर्थिक सुरक्षा और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर आधारभूत ढांचे, सामाजिक सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार के जरिए देश के गरीब वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, जो विकसित भारत के लक्ष्य की मजबूत नींव तैयार कर रहा है।
यमुना सफाई को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय पर जोर
इसी दिन गृह मंत्री ने यमुना नदी के पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों की समीक्षा भी की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि यमुना जैसी बड़ी पर्यावरणीय चुनौती का समाधान अलग-अलग प्रयासों से नहीं, बल्कि एकीकृत कार्ययोजना के माध्यम से ही संभव है।
उन्होंने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों के साथ संबंधित मंत्रालयों से एक टीम के रूप में कार्य करने की अपील की। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त यमुना का संकल्प लिया गया है और इसे जल्द से जल्द पूरा करना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
डेयरी अपशिष्ट से निपटने के लिए बनेगा नया मॉडल
बैठक में यमुना में डेयरियों से पहुंचने वाले कचरे और अपशिष्ट पर भी चर्चा हुई। गृह मंत्री ने बताया कि दिल्ली नगर निगम और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच एक समझौता किया जाएगा। इसके तहत डेयरी अपशिष्ट को बायोगैस और जैविक खाद में परिवर्तित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि एनडीडीबी मॉडल के अनुसार डेयरियों और गौशालाओं से निकलने वाला गोबर सीधे गैस एवं खाद संयंत्रों तक पहुंचाया जाएगा। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि अपशिष्ट का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल भी संभव हो सकेगा।
28.57 लाख मीट्रिक टन गाद हटाने का लक्ष्य, 97 फीसदी काम पूरा
गृह मंत्रालय के अनुसार, यमुना में गिरने वाले नालों की सफाई और गाद निकालने का कार्य तेज गति से चल रहा है। इस वर्ष 28.57 लाख मीट्रिक टन गाद हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें से लगभग 97 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष गाद को 15 जून तक हटाने की योजना है।
अमित शाह ने निर्देश दिया कि निकाली गई गाद का उपयोग निर्माण और विनिर्माण परियोजनाओं में किया जाए ताकि मानसून के दौरान यह दोबारा नदी में न पहुंच सके।
2027 तक लगेंगे 99 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अब तक 128 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2027 के अंत तक 99 नए एसटीपी लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
गृह मंत्री ने कहा कि केवल संतोषजनक कार्य करना पर्याप्त नहीं है। परियोजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन उनके परिणामों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, औद्योगिक अपशिष्ट और नालों के पानी की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
हर 20 दिन में होगी यमुना परियोजना की समीक्षा
अमित शाह ने सभी कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और डेयरी अपशिष्ट शोधन संयंत्रों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही यमुना में मिलने वाले नालों और जल स्रोतों में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) और टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स (टीएसएस) जैसे मानकों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने यमुना पुनर्जीवन परियोजना के प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने और दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। परियोजना की प्रगति पर नजर बनाए रखने के लिए हर 20 दिन में समीक्षा बैठक आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया।










