गोरखपुर|Sat, 16 May 2026: उत्तर प्रदेश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से हो रही जनगणना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को खुद ऑनलाइन स्वगणना प्रपत्र भरकर लोगों को बड़ा संदेश दिया। गोरखपुर प्रवास के दौरान गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित अपने आवास पर मुख्यमंत्री ने डिजिटल पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज की और प्रदेशवासियों से भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल स्वगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों की विकास नीतियों की मजबूत बुनियाद भी है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि 21 मई तक चलने वाली इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि सरकार को वास्तविक और सटीक डेटा मिल सके।
डिजिटल स्वगणना से तैयार होगी विकास की नई रूपरेखा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वगणना पोर्टल पर जाकर सभी आवश्यक कॉलम भरते हुए ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में पहली बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप दिया गया है, जो प्रशासनिक व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते उपयोग का बड़ा उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि “हमारी जनगणना-हमारा विकास” केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की कार्ययोजना का आधार है। सही आंकड़ों के जरिए ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की कोशिश है कि विकास की धारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी वर्ग योजनाओं से वंचित न रह जाए। ऐसे में जनगणना के आंकड़े नीति निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
7 मई से शुरू हुआ था अभियान
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 7 मई 2026 को लखनऊ से डिजिटल जनगणना के पहले चरण ‘स्वगणना’ का औपचारिक शुभारंभ किया था। इसके तहत नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से डेटा संग्रहण तेज, पारदर्शी और अधिक सटीक होगा। साथ ही रियल टाइम अपडेट मिलने से प्रशासन को योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुविधा मिलेगी।
तकनीक से पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी
सीएम योगी ने कहा कि पारंपरिक जनगणना की तुलना में डिजिटल प्रणाली अधिक प्रभावी साबित होगी। इससे डेटा प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और त्रुटियों की संभावना भी कम होगी।
उन्होंने कहा कि जनगणना 2027 केवल जनसंख्या गिनने की कवायद नहीं, बल्कि समग्र और समावेशी विकास का आधार तैयार करने की प्रक्रिया है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से सरकार भविष्य की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकेगी और उसी अनुरूप योजनाएं बनाई जाएंगी।
प्रदेश सरकार का मानना है कि डिजिटल स्वगणना से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक तस्वीर सामने आएगी, जिससे विकास योजनाओं का लाभ ज्यादा प्रभावी तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सकेगा।










