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दिल्ली ब्लास्ट मामले में अब ED की एंट्री: फंडिंग के तार विदेश तक, मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत केस दर्ज करने की तैयारी

On: November 12, 2025
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दिल्ली ब्लास्ट मामले में अब ED की एंट्री
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नई दिल्ली, बुधवार 12 नवम्बर 2025: दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। जांच में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गया है। शुरुआती जांच में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मॉड्यूल की संलिप्तता के संकेत मिलने के बाद ईडी ने इस नेटवर्क की फंडिंग पर फोकस बढ़ा दिया है।

सूत्रों के अनुसार, ईडी अब मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA – Prevention of Money Laundering Act) के तहत एक मामला दर्ज करने की तैयारी में है। एजेंसी को आशंका है कि इस हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक और हथियारों के लिए धनराशि सीमा पार से हवाला या अन्य अवैध माध्यमों से भेजी गई थी।

🕵️‍♂️ ED ने शुरू की फंडिंग की तहकीकात

ईडी ने इस मामले में पहले से जांच कर रही अन्य एजेंसियों — दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, जम्मू-कश्मीर पुलिस, यूपी एटीएस (UP ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) — से संपर्क किया है।
इन एजेंसियों से मॉड्यूल की वित्तीय लेनदेन की जानकारी, बैंक खातों के रिकॉर्ड, और हवाला नेटवर्क से जुड़ी सूचनाएं मांगी गई हैं।

एक वरिष्ठ ईडी अधिकारी ने बताया,

“जैश ए मोहम्मद का यह मॉड्यूल न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली तक फैला हुआ था। बड़े पैमाने पर विस्फोटक और हथियारों की खरीद के लिए पर्याप्त फंडिंग की व्यवस्था की गई थी। हमें यकीन है कि इस फंडिंग का स्रोत देश के बाहर है।”

🌐 सीमा पार से फंडिंग के संकेत

ईडी की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि डॉ. उमर नबी और मुजम्मिल नामक दो संदिग्ध हाल ही में तुर्किये गए थे और वहां से उन्होंने पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क साधा था।
यह दोनों कथित तौर पर आतंकी फाइनेंसरों से जुड़े रहे हैं और उन्हें दिल्ली धमाके में शामिल स्थानीय नेटवर्क के साथ जोड़ा जा रहा है।

जांच एजेंसियों को इस मॉड्यूल की दो कारें भी बरामद हुई हैं जिनमें से एक में विस्फोटक सामग्री और डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड मिले हैं। इन डिजिटल एविडेंस के आधार पर ईडी अब यह पता लगा रही है कि फंडिंग हवाला चैनल्स, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन, या थर्ड-पार्टी एन्क्रिप्टेड पेमेंट गेटवे के ज़रिए हुई थी या नहीं।

⚖️ मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत मामला दर्ज करने की तैयारी

ईडी अब इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की धाराओं में केस दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक,

“यह सिर्फ आतंकी हमला नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध भी है। फंडिंग के स्रोत का पता लगाकर मुख्य संचालकों तक पहुंचना अब हमारी प्राथमिकता है।”

ईडी पहले भी कश्मीर घाटी में आतंकवाद की आर्थिक जड़ों को खत्म करने में अहम भूमिका निभा चुकी है। हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद, और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों की फंडिंग से जुड़े कई हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश इसी एजेंसी ने किया था।

💰 हवाला और नार्को-टेरर से जुड़ी फंडिंग की जांच

एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि आतंकी फंडिंग के कई नए चैनल सामने आ रहे हैं —

  • हवाला नेटवर्क (Hawala Network): पुराने समय से सक्रिय फंडिंग रूट।
  • नार्को-टेरर (Narco-Terror): नशे की तस्करी से उत्पन्न धनराशि।
  • डिजिटल करेंसी (Digital Currency): क्रिप्टो और डार्क वेब ट्रांजैक्शन।

ईडी अब अंतरराष्ट्रीय वित्तीय खुफिया इकाइयों और Interpol Economic Crime Unit से भी सहयोग की योजना बना रही है, ताकि सीमा पार ट्रांजैक्शन का ट्रेल स्पष्ट हो सके।

🧩 आतंकी नेटवर्क का बहु-राज्य विस्तार

जांच एजेंसियों को मिले इनपुट्स के अनुसार, जैश मॉड्यूल की जड़ें चार राज्यों तक फैली थीं — जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली
दिल्ली धमाके में इस्तेमाल विस्फोटक और उपकरण इन राज्यों से ही ट्रांसफर किए गए थे। ईडी अब फंडिंग रूट मैप तैयार कर रही है, जिसमें बैंक ट्रांसफर, प्रॉक्सी अकाउंट और क्रिप्टो वॉलेट शामिल हैं।

🔍 आतंकवाद के खिलाफ ‘फाइनेंशियल स्ट्राइक’ की तैयारी

अधिकारी ने कहा कि जैसे सेना सीमाओं पर आतंकवाद से लड़ती है, वैसे ही ईडी अब आतंकवाद की आर्थिक नसों पर वार करने की रणनीति बना रही है।

“जब तक फंडिंग बंद नहीं होगी, आतंक की जड़ें नहीं कटेंगी। सिंधु नदी की तरह, यह पैसा कई दिशाओं से बहता है। हमें इसे हर स्रोत पर रोकना होगा।”

ईडी का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को कमजोर करने में टेरर फंडिंग नेटवर्क पर की गई कार्रवाई ने निर्णायक भूमिका निभाई थी, और वही रणनीति अब दिल्ली ब्लास्ट केस में भी अपनाई जाएगी।

📜 निष्कर्ष: आतंकी नेटवर्क की जड़ें आर्थिक तंत्र में

लाल किले के पास हुए धमाके की जांच अब केवल सुरक्षा एजेंसियों की नहीं रही, बल्कि यह अब एक फाइनेंशियल टेररिज्म केस बन गई है।
ईडी का लक्ष्य अब फंडिंग चैनल को ट्रैक करना, मध्यस्थों को गिरफ्तार करना और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए आतंकवाद को सहारा देने वालों को सजा दिलाना है।
यह जांच इस बात की भी याद दिलाती है कि आतंकवाद की असली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि पैसा होता है — और अब भारत उस पैसे के स्रोत तक पहुंचने की राह पर है।

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