नई दिल्ली/02 नवंबर 2026: दिवाली पर पटाखे जलाने को लेकर दिल्ली-NCR के लोगों के लिए बड़ी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण की चिंता और त्योहार मनाने के अधिकार के बीच संतुलन बनाते हुए सीमित अवधि के लिए ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, यह छूट कुछ शर्तों के साथ दी गई है। अदालत के आदेश के मुताबिक, 7 और 8 नवंबर 2026 को निर्धारित समय के दौरान ही पटाखे जलाए जा सकेंगे। अस्पतालों, स्कूलों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों की अनुमति: 7 और 8 नवंबर को मिलेगी छूट
दिल्ली-NCR में दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है।
अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बनी हुई है। त्योहारों के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और ध्वनि प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने 7 और 8 नवंबर 2026 को सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखों की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया है कि 9 नवंबर से दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएगा।
पटाखे जलाने का समय क्या रहेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के दौरान पटाखे जलाने के लिए दो समय निर्धारित किए हैं। इनका पालन करना अनिवार्य होगा।
| दिनांक | सुबह का समय | रात का समय |
|---|---|---|
| 7 नवंबर 2026 | सुबह 6 से 7 बजे | रात 8 से 10 बजे |
| 8 नवंबर 2026 | सुबह 6 से 7 बजे | रात 8 से 10 बजे |
निर्धारित समय के अलावा पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल दो दिनों के लिए है। 9 नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध बहाल हो जाएगा।
अस्पतालों और स्कूलों के 300 मीटर दायरे में पटाखे पूरी तरह प्रतिबंधित
सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष निर्देश जारी किए हैं।
अदालत के आदेश के अनुसार, निम्नलिखित स्थानों के 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के पटाखे नहीं जलाए जा सकेंगे:
- अस्पताल और नर्सिंग होम
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला स्वास्थ्य केंद्र
- वृद्धाश्रम
- अधिसूचित साइलेंस जोन
- शैक्षणिक संस्थान, जिनमें स्कूल और कॉलेज शामिल हैं
इन सभी क्षेत्रों को अनिवार्य रूप से ‘नो-क्रैकर जोन’ घोषित किया जाएगा। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि इनकी सीमाओं को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाए और आम लोगों को इसकी जानकारी दी जाए।
केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही जलाने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि सभी प्रकार के पटाखों को इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा। केवल उन्हीं ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार प्रमाणित किया गया है।
अदालत ने सीएसआईआर-नीरी (CSIR-NEERI) से प्रमाणित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल पर जोर दिया है। बेरियम युक्त पटाखों और ऐसे पटाखों पर प्रतिबंध रहेगा, जिन्हें ग्रीन पटाखों के रूप में स्वीकृति नहीं मिली है।
इसके अलावा पटाखों की लड़ियां और माला जैसे श्रृंखलाबद्ध पटाखों के निर्माण एवं बिक्री पर भी रोक रहेगी। प्रशासन को अवैध और पारंपरिक पटाखों की आपूर्ति रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन को सख्ती से नियम लागू कराने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR के संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
नो-क्रैकर जोन की पहचान, बैरिकेडिंग, स्पष्ट मार्किंग और व्यापक प्रचार-प्रसार के जरिए लोगों को नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहार के दौरान मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और अन्य संवेदनशील लोगों को परेशानी न हो।
दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर निगरानी रखने के लिए संबंधित एजेंसियों को भी सक्रिय रहने को कहा गया है।
प्रदूषण और त्योहार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश
दिवाली पर पटाखे जलाना कई परिवारों के लिए परंपरा का हिस्सा है, लेकिन दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की समस्या भी गंभीर चिंता का विषय बनी रहती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखों की अनुमति देकर दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। हालांकि, ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल से भी प्रदूषण पूरी तरह समाप्त नहीं होता। इसलिए निर्धारित समय और स्थान संबंधी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
दिवाली की खुशियां तभी सार्थक होंगी, जब त्योहार मनाते समय दूसरों के स्वास्थ्य और पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाए।












