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वीबी-जीरामजी योजना में भ्रष्टाचार पर नकेल, 15 दिनों में होगा शिकायतों का निपटारा; केंद्र ने जारी किए नए नियम

On: November 2, 2026
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वीबी-जीरामजी योजना में भ्रष्टाचार पर नकेल
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नई दिल्ली/02 नवंबर 2026: ग्रामीण रोजगार योजना में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 के तहत शिकायत निवारण से जुड़े नए नियम अधिसूचित किए गए हैं। अब ग्रामीण रोजगार योजना से संबंधित शिकायतों का निपटारा अधिकतम 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि तय समय में शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो उसे उच्च स्तर पर भेजा जाएगा। केंद्र सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीणों की शिकायतों को समय पर सुनना, जवाबदेही तय करना और योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाना है।

वीबी-जीरामजी योजना में शिकायतों का निपटारा 15 दिन में करना होगा

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से अधिसूचित नए नियमों के तहत ग्रामीण रोजगार योजना में शिकायतों के समाधान के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था लागू की जाएगी। इसमें ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायतों का निपटारा किया जाएगा।

राज्य सरकारों को इन तीनों स्तरों पर शिकायत निवारण की व्यवस्था स्थापित करनी होगी। प्रत्येक स्तर पर नामित अधिकारी शिकायतें प्राप्त करेंगे, उनकी जांच करेंगे और निर्धारित समय-सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित करेंगे।

मंत्रालय के अनुसार, शिकायत निवारण की प्रक्रिया को आम ग्रामीणों के लिए सुलभ बनाना इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है। योजना के लाभार्थियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें, इस पर भी जोर दिया गया है।

ग्रामीण रोजगार योजना में शिकायत कैसे दर्ज करा सकेंगे?

नए नियमों के तहत ग्रामीण रोजगार योजना से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने के लिए कई माध्यम उपलब्ध होंगे। शिकायतकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी निर्धारित माध्यम का इस्तेमाल कर सकेंगे।

शिकायत दर्ज कराने के प्रमुख तरीके इस प्रकार हैं:

  • संबंधित कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से शिकायत देना।
  • स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेजना।
  • निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना।
  • टेलीफोन हेल्पलाइन के जरिए शिकायत करना।
  • राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल करना।

खास बात यह है कि शिकायत के प्रारूप, भाषा, जमा करने के तरीके या किसी प्रक्रियागत कमी के आधार पर उसे दर्ज करने से इनकार नहीं किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया या औपचारिक दस्तावेज तैयार करने में परेशानी होती है।

सात कार्यदिवस में पूरी करनी होगी शिकायत की जांच

केंद्र सरकार ने शिकायतों के निपटारे के लिए समय-सीमा तय करने के साथ उनकी जांच प्रक्रिया को भी व्यवस्थित किया है।

नए नियमों के अनुसार, ग्राम पंचायत, ब्लॉक या जिला स्तर पर प्राप्त शिकायतों को उसी दिन निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करना होगा। यदि किसी कारण से ऐसा संभव नहीं होता है, तो अगले कार्यदिवस तक शिकायत का पंजीकरण अनिवार्य होगा।

शिकायत दर्ज होने के बाद आवेदक को रसीद दी जाएगी। इसमें शिकायत की पंजीकरण संख्या, प्राप्त होने की तारीख और शिकायत प्राप्त करने वाले अधिकारी का पदनाम दर्ज होगा।

इसके बाद शिकायत की जांच सात कार्यदिवस के भीतर पूरी करनी होगी, जबकि उसका अंतिम निपटारा 15 दिनों के अंदर करना अनिवार्य होगा।

शिकायत की जांच में अधिकारी मांग सकेंगे रिकॉर्ड और दस्तावेज

नए नियमों के तहत शिकायत निवारण अधिकारियों को जांच के दौरान जरूरी रिकॉर्ड, दस्तावेज, रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्राप्त करने का अधिकार होगा।

यदि किसी मामले में शिकायतकर्ता का पक्ष सुनना आवश्यक हो, तो अधिकारी उसे व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर भी दे सकता है।

इस व्यवस्था से शिकायतों की जांच केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।

15 दिन में समाधान नहीं हुआ तो उच्च स्तर पर जाएगी शिकायत

सरकार ने शिकायतों के निपटारे में देरी को रोकने के लिए एस्केलेशन यानी उच्च स्तर पर भेजने की व्यवस्था भी बनाई है।

यदि ग्राम पंचायत, ब्लॉक या जिला स्तर पर निर्धारित समय के भीतर शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो उसे अगले स्तर पर भेजा जाएगा। ऐसे मामलों की इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से निगरानी भी जारी रहेगी, जब तक उनका निपटारा नहीं हो जाता।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिकायतें केवल दर्ज होकर लंबित न रह जाएं और संबंधित अधिकारी समय पर कार्रवाई करें।

ग्रामीण रोजगार योजना में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश

ग्रामीण रोजगार योजनाओं में मजदूरी भुगतान, काम की उपलब्धता, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और अन्य अनियमितताओं को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में शिकायत निवारण की समयबद्ध व्यवस्था ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के तहत शिकायतों का पंजीकरण, जांच, समय-सीमा और उच्च स्तर पर निगरानी को एक प्रक्रिया में शामिल किया गया है।

हालांकि, नियमों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक अधिकारी कितनी तत्परता से शिकायतों पर कार्रवाई करते हैं। यदि व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो ग्रामीण रोजगार योजना में जवाबदेही बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

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