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Delhi Pollution: ‘उम्मीद है आप दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे’, प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का तंज, वाहनों और पराली पर जताई चिंता

On: November 6, 2026
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Delhi Pollution, प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का तंज, वाहनों और पराली पर जताई चिंता
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नई दिल्ली (06 नवंबर 2026)। दिल्ली-एनसीआर की जहरीली होती हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान गंभीर चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अदालत में मौजूद लोगों से व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।” उनकी इस टिप्पणी के पीछे राजधानी की बिगड़ती वायु गुणवत्ता की गंभीर स्थिति साफ नजर आई। सुनवाई के दौरान पराली जलाने, वाहनों से निकलने वाले धुएं, कचरा जलाने और प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल पाबंदियां लगाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। वरिष्ठ अधिवक्ता और मामले में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जहरीली हवा के कारण उनकी आवाज भी प्रभावित हो रही है। स्थिति की गंभीरता बताते हुए उन्होंने इसकी तुलना रोजाना 30 सिगरेट पीने के बराबर प्रदूषण के संपर्क में रहने से की।

दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, पराली और स्थानीय प्रदूषण पर कार्रवाई जरूरी

सुनवाई के दौरान अपराजिता सिंह ने बताया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान करीब 14 प्रतिशत रहा। उन्होंने कहा कि राजधानी पहले से ही प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में पराली जलाने से हालात और बिगड़ जाते हैं।

उन्होंने अदालत के सामने परिवहन को भी प्रदूषण का बड़ा कारण बताया। उनके मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से निकलने वाला धुआं, ऊर्जा उत्पादन और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं।

अपराजिता सिंह ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल पराली जलाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा। स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों पर भी प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।

सीजेआई सूर्यकांत ने पराली जलाने और किसानों की समस्या पर क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली में बारिश के कारण प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी आई थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसानों के लिए अगली फसल की बुवाई का समय है और ऐसे में पराली जलाने की समस्या पर रोक लगनी चाहिए।

हालांकि, सुनवाई में पराली प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई। अदालत ने किसानों को पराली बेचने के लिए उचित आर्थिक प्रोत्साहन देने की जरूरत पर जोर दिया। सीजेआई ने सुझाव दिया कि पराली की खरीद का मूल्य पहले से घोषित किया जाना चाहिए, ताकि किसान उसे जलाने के बजाय बेचने का विकल्प चुन सकें।

पीठ ने यह भी कहा कि पराली प्रबंधन की मशीनें ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। छोटे किसान महंगी मशीनें खरीदने में सक्षम नहीं होते, इसलिए सामुदायिक स्तर पर ऐसी व्यवस्था अधिक उपयोगी हो सकती है।

‘केवल पाबंदियों से नहीं सुलझेगी प्रदूषण की समस्या’

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के दौरान प्रदूषण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। बार-बार आदेश जारी करने से नियमों के उल्लंघन की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।

पीठ ने कहा कि लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना जरूरी है। त्योहारों के दौरान पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि लोग अपनी पुरानी परंपराओं की ओर क्यों नहीं लौट सकते। अदालत की टिप्पणी का आशय यह था कि त्योहारों की खुशी और पर्यावरण की जिम्मेदारी एक-दूसरे के विरोध में नहीं होनी चाहिए।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी त्योहारों के व्यावसायीकरण से जुड़े पहलुओं पर टिप्पणी की। अदालत में यह बात सामने आई कि दिवाली के दौरान पटाखों और अन्य गतिविधियों के कारण प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है।

दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दिल्ली और आसपास के शहरों को जोड़ने वाली सड़कों पर वाहनों की भारी भीड़ को लेकर चिंता जताई। पीठ ने सवाल किया कि प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराना कितना उचित है, जबकि निजी वाहनों और यातायात से भी बड़ी मात्रा में प्रदूषण फैलता है।

अदालत ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी ध्यान दिलाया। दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या और सड़कों पर लगने वाले जाम को प्रदूषण के प्रमुख कारणों में गिना गया।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें दूसरे शहरों से दिल्ली में आने वाली बसों और डीजल से चलने वाले वाहनों को लेकर किए जा रहे उपाय भी शामिल हैं।

‘गरीब लोग प्रदूषण नहीं फैलाते, वे खुद इसके शिकार होते हैं’

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को जिम्मेदार ठहराने के खिलाफ भी आगाह किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि दिवाली का समय उन लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, जिनकी आजीविका मौसमी काम और त्योहारों पर निर्भर करती है।

सीजेआई ने टिप्पणी की, “गरीब लोग प्रदूषण नहीं फैलाते। बल्कि, वे खुद इसके शिकार होते हैं। प्रदूषण तो वे लोग फैलाते हैं जो इसका खर्च उठा सकते हैं और जो इसमें योगदान देते हैं।”

अदालत की इस टिप्पणी में प्रदूषण के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया। त्योहारों के दौरान पटाखों की बिक्री, मौसमी रोजगार और प्रदूषण से प्रभावित लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया।

दिल्ली की हवा अब भी चिंताजनक, कई इलाकों में AQI गंभीर श्रेणी में

दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति शुक्रवार को भी चिंताजनक बनी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत AQI 389 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, कई निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर पहुंच गया।

IIT दिल्ली और रोहिणी में AQI 474, पंजाबी बाग में 465 और आरके पुरम में 443 दर्ज किया गया। इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रही।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या हर साल सर्दियों के दौरान गंभीर रूप लेती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि इस संकट से निपटने के लिए पराली जलाने पर रोक, परिवहन व्यवस्था में सुधार, स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण और जन-जागरूकता जैसे उपायों को साथ लेकर चलना होगा।

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