नई दिल्ली/रविवार, 6 सितंबर 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार ने वर्ष 2029 तक ड्रग्स मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए मादक पदार्थों की तस्करी, उनके वित्तपोषण, वितरण और इससे जुड़े नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है और इस अभियान में नशे के खिलाफ लड़ाई को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है।
रविवार को मादक पदार्थों के मुद्दे पर हुई उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद प्रेसवार्ता में शाह ने कहा कि ड्रग्स का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या नहीं है। इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है और मादक पदार्थों से अर्जित काले धन का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने में भी किया जा सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्सों में नार्को-टेरर के नेटवर्क को लेकर चिंता बढ़ी है।
ड्रग्स मुक्त भारत के लिए तीन साल का रोडमैप
अमित शाह के मुताबिक, ड्रग्स मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने अगले तीन वर्षों के लिए एक राष्ट्रव्यापी और समन्वित रणनीति तैयार की है। इसका मकसद केवल छोटे स्तर के तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क पर प्रहार करना है।
सरकार की रणनीति चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई और ऑपरेशन, सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, नशीले पदार्थों की मांग और उनसे होने वाले नुकसान को कम करना तथा संस्थागत क्षमता और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल शामिल है।
शाह ने कहा कि पहले मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई अलग-अलग एजेंसियों और छोटी इकाइयों तक सीमित रहती थी। कई बार कार्रवाई छोटे आरोपितों की गिरफ्तारी तक सिमट जाती थी। अब सरकार इस लड़ाई को व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देख रही है।
राज्यों से लेकर जिला स्तर तक बनाया गया समन्वय तंत्र
गृह मंत्री ने बताया कि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए 2019 में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी फॉर काउंटरिंग ड्रग्स ट्रैफिकिंग यानी एनसीओआरडी तंत्र बनाया गया था। यह व्यवस्था कार्यपालिका के साथ राज्य और जिला स्तर पर भी समन्वय स्थापित करने के लिए तैयार की गई है।
उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की गई है। स्थानीय पुलिस को भी राष्ट्रीय रणनीति से जोड़ा गया है, ताकि कार्रवाई केवल केंद्रीय एजेंसियों तक सीमित न रहे।
सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकारों के बीच संयुक्त कार्रवाई को मजबूत करने के लिए संयुक्त समन्वय समिति का भी गठन किया है। इसका उद्देश्य बड़े ड्रग्स नेटवर्क, उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्क और कार्रवाई से जुड़ी कमियों की पहचान कर उन पर मिलकर निर्णय लेना है। शाह ने यह भी कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को मजबूत किया गया है।
ड्रग्स के पैसे और आतंकवाद के कनेक्शन पर नजर
अमित शाह ने मादक पदार्थों के कारोबार से होने वाली अवैध कमाई को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ड्रग्स से पैदा होने वाला काला धन कई बार आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण में इस्तेमाल होता है। यही कड़ी आगे चलकर नार्को-टेरर मॉड्यूल को मजबूत कर सकती है।
इसलिए सरकार की रणनीति में केवल मादक पदार्थों की जब्ती और आरोपितों की गिरफ्तारी ही शामिल नहीं है। इसके पीछे काम कर रहे वित्तीय नेटवर्क, तस्करी के रास्तों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन पर भी कार्रवाई का जोर है।
गोवा में भाजपा मुख्यालय का उद्घाटन समारोह हुआ छोटा
अमित शाह ने रविवार को गोवा में भाजपा के नए राज्य मुख्यालय का उद्घाटन भी किया। हालांकि, दिल्ली में इमारत गिरने की घटना के कारण कार्यक्रम को छोटा कर दिया गया।
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया कि दिल्ली की घटना के मद्देनजर उद्घाटन समारोह को संक्षिप्त किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल से रवाना हो चुके अमित शाह ने नए भवन के उद्घाटन पर पार्टी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं।
मादक पदार्थों के खिलाफ सरकार की मौजूदा रणनीति से साफ है कि ड्रग्स मुक्त भारत का लक्ष्य केवल तस्करी रोकने तक सीमित नहीं रखा गया है। सरकार अब तस्करी के नेटवर्क, वित्तीय स्रोत, सिंथेटिक ड्रग्स, मांग में कमी और पुनर्वास जैसे पहलुओं को एक ही रणनीति में जोड़कर आगे बढ़ने की बात कर रही है।












