दक्षिणी दिल्ली/रविवार, 6 सितंबर 2026: दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट में रविवार को एक पुरानी पीजी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। सत्य निकेतन हादसा इतना भयावह था कि तेज धमाके जैसी आवाज और आसपास की इमारतों के हिलने से लोगों को पहले लगा कि भूकंप आया है। घबराए लोग जब घरों से बाहर निकले तो सामने का मंजर देखकर सन्न रह गए। जिस जगह कुछ देर पहले तक एक इमारत खड़ी थी, वहां मलबे का ढेर और धूल का घना गुबार दिखाई दे रहा था।
बताया जा रहा है कि ढही इमारत करीब 80 साल पुरानी थी और उसमें पीजी संचालित हो रहा था। हादसे के समय भवन में निर्माण कार्य चलने की भी जानकारी सामने आई है। इमारत के मलबे में कई छात्रों के दबे होने की आशंका के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और राहत दलों के पहुंचने से पहले ही बचाव की कोशिश शुरू कर दी।
तेज आवाज सुनकर लोगों ने समझा भूकंप आया है
स्थानीय निवासी हिमांशु के मुताबिक, हादसा इतना अचानक हुआ कि कुछ क्षणों तक किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। जोरदार आवाज के बाद जब लोग बाहर निकले तो चारों तरफ धूल का गुबार था। कुछ ही देर में स्पष्ट हुआ कि बगल की इमारत पूरी तरह ढह चुकी है।
जब लोगों को पता चला कि इमारत में पीजी चलता था, तो चिंता और बढ़ गई। आशंका थी कि अंदर कई लोग फंसे हो सकते हैं। इसी दौरान छात्र सक्षम यादव ने बताया कि उसके चार दोस्त मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। इसके बाद आसपास मौजूद लोग बिना देर किए मलबे की ओर दौड़ पड़े।
किसी ने हाथों से मलबा हटाने की कोशिश की तो कोई अंदर से आने वाली आवाजों को सुनने के लिए मौके पर खड़ा रहा। उस वक्त स्थानीय लोगों के लिए हर गुजरता मिनट भारी था।
करीब 10 मिनट बाद पहुंची पुलिस, 20 मिनट में आई एंबुलेंस
हिमांशु ने बताया कि हादसे के करीब 10 मिनट बाद पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके लगभग 20 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची, जबकि एनडीआरएफ की टीम को मौके तक पहुंचने में करीब 45 मिनट लगे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी। पास की एक अन्य इमारत के भी टेढ़े होने की बात सामने आई है। लोगों का सवाल है कि ऐसी स्थिति के बावजूद आसपास संचालित पीजी और अन्य गतिविधियों को लेकर पहले से पर्याप्त सावधानी क्यों नहीं बरती गई।
हालांकि, इन दावों और भवन की स्थिति को लेकर संबंधित जांच में सामने आने वाले आधिकारिक तथ्यों का इंतजार किया जाना बाकी है।
चाय की दुकान पर बैठे थे लोग, अचानक आंखों के सामने गिर गई पूरी इमारत
प्रत्यक्षदर्शी तनिष्क ने बताया कि वह नागोरी चाय पर बैठे थे। तभी अचानक पीजी की इमारत भरभराकर नीचे आ गिरी। कुछ ही पलों में आसपास मौजूद लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े और पुलिस को सूचना दी।
पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। इसी बीच स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। मलबे में छात्रों के फंसे होने की सूचना ने पूरे इलाके को बेचैन कर दिया था।
एनडीआरएफ की टीम के पहुंचने के बाद व्यवस्थित तरीके से रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ाया गया।
‘बिल्डिंग की हालत खराब थी’, दोस्तों ने सुनाई राहुल की आखिरी चिंता
हादसे के बाद सामने आए प्रत्यक्षदर्शियों और छात्रों के बयानों में इमारत की खराब हालत को लेकर पहले से चिंता की बात कही गई है। अनुराग ने बताया कि उसके दोस्त राहुल ने शुक्रवार को फोन कर नए पीजी की तलाश करने की बात कही थी।
अनुराग के मुताबिक, राहुल ने बताया था कि पीजी में बहुत शोर रहता है और इमारत की हालत भी खराब है। उसे हादसे का डर बना रहता था। उसने किराया अधिक होने और सुविधाएं कम मिलने की बात भी कही थी।
अनुराग ने बताया कि शुक्रवार को ही दोनों के बीच इस बारे में बातचीत हुई थी। लेकिन रविवार दोपहर करीब दो बजे उसे पता चला कि वही इमारत ढह गई है और मलबे में दबने से उसके दोस्त राहुल की मौत हो गई।
सत्य निकेतन हादसा ने राजधानी में पुराने और जर्जर भवनों में संचालित पीजी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस इमारत की हालत को लेकर वहां रहने वाले लोग पहले से आशंकित थे, उसकी सुरक्षा को लेकर समय रहते क्या कदम उठाए गए थे। घटना की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।












