नई दिल्ली/30 जुलाई 2026। E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से चल रही आशंकाओं के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अब तक हुए वैज्ञानिक परीक्षणों में ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल से वाहनों का इंजन खराब होता है या कोई गंभीर तकनीकी दिक्कत पैदा होती है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ वाहनों में माइलेज पर हल्का असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, ईंधन दक्षता में करीब 2 से 6 प्रतिशत तक कमी आ सकती है, जो वाहन की श्रेणी, तकनीक और उसकी उम्र पर निर्भर करेगी।
E20 पेट्रोल से पर्यावरण को मिलेगा बड़ा लाभ
लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में गडकरी ने कहा कि E20 पेट्रोल सिर्फ वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि ई-10 पेट्रोल की तुलना में ई-20 के इस्तेमाल से करीब 30 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन कम होता है। इसके साथ ही वाहन का एक्सेलेरेशन बेहतर रहता है और ड्राइविंग अनुभव भी अधिक स्मूथ महसूस होता है।
सरकार का मानना है कि एथनॉल मिश्रित ईंधन जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
ARAI, SIAM और IOCL ने मिलकर किया अध्ययन
गडकरी ने बताया कि E20 पेट्रोल के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने संयुक्त रूप से किया।
इस अध्ययन में BS-3, BS-4 और BS-6 मानकों वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों को शामिल किया गया। परीक्षण प्रयोगशाला और वास्तविक सड़क परिस्थितियों, दोनों में किए गए। सभी परीक्षण वाहन निर्माताओं के सहयोग और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप संपन्न हुए।
पुराने वाहनों को लेकर उठे सवालों पर सरकार का जवाब
मंत्री ने माना कि E20 पेट्रोल को लेकर विपक्ष और कुछ उपभोक्ता संगठनों ने पुराने वाहनों की अनुकूलता, कम माइलेज और संभावित रखरखाव लागत जैसे मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस ईंधन को अचानक लागू नहीं किया, बल्कि वैज्ञानिक परीक्षणों और विशेषज्ञ संस्थानों की सलाह के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।
उन्होंने याद दिलाया कि देश में 2006 में E5 ईंधन की शुरुआत हुई थी और उसके बाद एथनॉल मिश्रण का प्रतिशत धीरे-धीरे बढ़ाया गया। पिछले लगभग ढाई वर्षों से E19 और E20 पेट्रोल का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है।
20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया और 3 करोड़ पेट्रोल कारें चला रहीं E20
नितिन गडकरी ने दावा किया कि वर्तमान में देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें एथनॉल मिश्रित ईंधन पर चल रही हैं। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने जैसी घटनाओं की पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में E20 पेट्रोल के कारण असामान्य जंग, अतिरिक्त घिसावट या वाहन की उम्र कम होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। साथ ही, वाहन निर्माता E20 इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को वारंटी भी दे रहे हैं, जो इस ईंधन की सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करता है।












