लखनऊ, 19 अप्रैल 2026 (रविवार)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से रविवार को सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत ऐसे माहौल में हुई, जहां आस्था, परंपरा और जनभावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने इस विशेष यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जैसे ही ट्रेन आगे बढ़ी, स्टेशन परिसर ‘जय सोमनाथ’ के नारों और शंखध्वनि से गूंज उठा।
इस यात्रा की खासियत सिर्फ एक धार्मिक पहल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की वर्षों पुरानी इच्छाओं को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम के रूप में सामने आई है। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच रवाना हुई इस ट्रेन ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा: आस्था और संस्कृति का संगम
गुजरात स्थित Somnath Temple के दर्शन के लिए निकली यह यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव का भी माध्यम बन रही है। विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालुओं ने इसे एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए सरकार की सराहना की।
यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि अलग-अलग राज्यों की संस्कृति को समझने का अवसर भी मिलेगा। कई यात्रियों के लिए यह जीवन का पहला तीर्थ अनुभव है, जो इस पहल को और भी खास बना देता है।
श्रद्धालुओं की भावनाएं: ‘सपना हुआ साकार’
मुजफ्फरनगर के बंती खेड़ा निवासी सतीश कुमार की आंखों में खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने बताया कि वर्षों से सोमनाथ धाम जाने की इच्छा थी, लेकिन परिस्थितियां कभी अनुकूल नहीं रहीं। “अब लग रहा है कि सच में भगवान ने बुलाया है,” उन्होंने भावुक स्वर में कहा।
वहीं बरेली की बिंदु इशिका सिंघानिया ने इस यात्रा को “संस्कृति को जोड़ने वाला सेतु” बताया। उनके मुताबिक, यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में मदद करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बड़ी राहत
आजमगढ़ के अनंत तिवारी का मानना है कि सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं, जो आर्थिक कारणों से तीर्थ यात्रा नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि “श्रद्धा तो हर किसी के मन में होती है, लेकिन हर किसी के पास साधन नहीं होते। सरकार ने यह अंतर मिटाने की कोशिश की है।”
मेरठ के अनंत राणा, जो पहली बार इस यात्रा पर निकले हैं, ने बताया कि ग्रामीण इलाकों के लोगों को इससे खास फायदा मिलेगा। उनके अनुसार, “ऐसी यात्राएं सिर्फ धार्मिक नहीं होतीं, यह लोगों को जोड़ने का काम भी करती हैं।”
सरकार का संदेश: विकास के साथ विरासत भी जरूरी
बिजनौर, गोरखपुर और अन्य जिलों से आए श्रद्धालुओं ने भी इस पहल का स्वागत किया। उनका मानना है कि सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि विकास केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी उतनी ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के शुभारंभ के साथ यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार अब आस्था और विकास के संतुलन को नई दिशा देने की कोशिश कर रही है—जहां आधुनिकता के साथ परंपराओं का सम्मान भी बराबरी से किया जाए।












