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दक्षिण चीन सागर के बीच भारत-वियतनाम रिश्तों को नई ऊंचाई, ब्रह्मोस मिसाइल डील पर भी बढ़ी चर्चा

On: May 6, 2026
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दक्षिण चीन सागर के बीच भारत-वियतनाम रिश्तों को नई ऊंचाई, ब्रह्मोस मिसाइल डील पर भी बढ़ी चर्चा
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नई दिल्ली (Wed, 06 May 2026)। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत और वियतनाम ने अपने रिश्तों को नई रणनीतिक ऊंचाई देने का बड़ा फैसला किया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और वियतनाम के राष्ट्रपति To Lam के बीच बुधवार को नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने संबंधों को “संवर्धित व्यापक रणनीतिक साझेदारी” (Enhanced Comprehensive Strategic Partnership) का दर्जा देने पर सहमति जताई।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां और समुद्री दावों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि भारत और वियतनाम अब केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी मजबूत साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने साफ कहा कि दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए और किसी भी देश को सैन्य ताकत के जरिए दबाव बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यह संदेश सीधे तौर पर चीन की आक्रामक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

ब्रह्मोस मिसाइल डील पर बढ़ी चर्चा, रक्षा सहयोग होगा और मजबूत

भारत-वियतनाम वार्ता में रक्षा सहयोग सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहा। सूत्रों के अनुसार बैठक में भारत-रूस द्वारा विकसित सुपरसोनिक BrahMos missile मिसाइल सिस्टम की संभावित बिक्री पर भी चर्चा हुई। इससे पहले फिलीपींस इस मिसाइल सिस्टम को खरीद चुका है और अब वियतनाम को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ रही है।

विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पी कुमारन ने पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। भारत ने वियतनाम को सुखोई लड़ाकू विमानों के रखरखाव और तकनीकी सहायता देने की पेशकश भी की है।

दोनों देशों ने 2030 तक रक्षा संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए पहले जारी संयुक्त दृष्टि पत्र की समीक्षा भी की। इसके तहत रक्षा नीति संवाद, संयुक्त सैन्य अभ्यास, स्टाफ टॉक्स, नई रक्षा तकनीकों पर शोध, सह-उत्पादन, नौसेना सहयोग और सूचना साझा करने जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा।

दक्षिण चीन सागर पर भारत और वियतनाम का स्पष्ट संदेश

संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि क्षेत्रीय समृद्धि और सुरक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। नेताओं ने समुद्री शांति, स्थिरता और आवागमन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया।

उन्होंने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुसार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता बताई और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत और वियतनाम की यह साझा सोच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

2030 तक 25 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया। इसके साथ ही डिजिटल भुगतान, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा, दुर्लभ खनिज और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच कुल 13 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें डिजिटल फाइनेंशियल कनेक्टिविटी को लेकर भी अहम निर्णय शामिल रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा यह दिखाती है कि वियतनाम भारत के साथ संबंधों को कितनी प्राथमिकता देता है। पीएम मोदी ने कहा कि रणनीतिक साझेदारी का दायरा अब सुरक्षा से आगे बढ़कर संस्कृति, कनेक्टिविटी, क्षमता विस्तार और सप्लाई चेन तक पहुंचेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत के Unified Payments Interface (UPI) और वियतनाम के फास्ट पेमेंट सिस्टम को जल्द जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच वित्तीय लेनदेन और आसान होगा।

हिंद-प्रशांत में भारत-वियतनाम की बढ़ती नजदीकी क्यों अहम?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और वियतनाम की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन, सप्लाई चेन सुरक्षा और चीन की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ साझा रणनीतिक सोच का भी संकेत है।

दुर्लभ खनिजों, रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की बढ़ती भागीदारी आने वाले वर्षों में एशिया की भू-राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

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