लखनऊ, 27 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में बिजली परियोजनाओं के नाम पर लंबे समय से अटकी जमीनों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। कानपुर देहात की भोगनीपुर तहसील में दो थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के लिए निजी कंपनियों को आवंटित 944.029 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद कर दिया गया है। सरकार के अनुसार दोनों कंपनियों ने जमीन मिलने के करीब 15 वर्ष बाद भी परियोजना का निर्माण शुरू नहीं किया। इतना ही नहीं, अनुबंध में लगी पाबंदियों के बावजूद जमीन को बैंकों में बंधक रखने का मामला भी सामने आया।
सरकार ने अब यह जमीन वापस ऊर्जा विभाग में निहित करने और राजस्व अभिलेखों में इसे उत्तर प्रदेश सरकार तथा ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
कानपुर देहात में 944 हेक्टेयर जमीन पर सरकार का बड़ा फैसला
मामला भोगनीपुर तहसील में वर्ष 2011 में शुरू हुआ था। थर्मल पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने के उद्देश्य से लैंको अनपारा पावर लिमिटेड और हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को बड़े भूखंड आवंटित किए गए थे।
लैंको अनपारा पावर लिमिटेड को कुल 375.378 हेक्टेयर और हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को 568.651 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। दोनों का कुल क्षेत्रफल 944.029 हेक्टेयर बैठता है।
सरकार का कहना है कि परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने के बावजूद कंपनियों ने निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। इस बीच जमीन को बिना अनुमति बैंकों में गिरवी रखने की जानकारी भी सामने आई।
तीन साल में प्रोजेक्ट पूरा करना था, 15 साल में भी नहीं शुरू हुआ काम
ऊर्जा विभाग और कंपनियों के बीच हुए समझौते में परियोजना को लेकर समय सीमा स्पष्ट थी। अनुबंध के मुताबिक जमीन पर कब्जा मिलने के तीन वर्ष के भीतर पावर प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा किया जाना था।
लेकिन निर्धारित अवधि गुजरने के बाद भी दोनों परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हुआ। करीब 15 वर्ष बीतने के बाद भी जमीन का परियोजना के उद्देश्य से इस्तेमाल नहीं किया गया। सरकार ने इसे अनुबंध की मूल शर्त का उल्लंघन माना।
यहीं से मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि जांच में जमीन को बैंकों के पास गिरवी रखे जाने की जानकारी सामने आई।
बिना सरकारी अनुमति बैंकों में बंधक रखी जमीन
अनुबंध में साफ प्रावधान था कि राज्य सरकार की अनुमति के बिना कंपनियां आवंटित जमीन को बेच, लीज या बंधक नहीं रख सकती थीं। इसके बावजूद दोनों कंपनियों पर इस शर्त का उल्लंघन करने का आरोप है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड ने बिना अनुमति जमीन आईडीबीआई बैंक के पास बंधक रखी। वहीं लैंको अनपारा पावर लिमिटेड ने जमीन को केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में गिरवी रखा।
सरकार का कहना है कि इन मामलों में शासन या ऊर्जा विभाग से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। विभाग को इस संबंध में कोई औपचारिक सूचना भी नहीं दी गई।
कारण बताओ नोटिस का भी नहीं मिला जवाब
अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर शासन ने दोनों कंपनियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया। 25 मई 2026 को अनुबंध की शर्त 4(6) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया।
नोटिस कंपनियों के पंजीकृत पते और ईमेल पर भेजे गए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनियों को नोटिस प्राप्त भी हुए, लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी शासन को उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण या जवाब नहीं मिला।
इसके बाद सरकार ने मामले में अंतिम कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
25 अगस्त को अपर मुख्य सचिव ने जारी किया अंतिम आदेश
मामले में 25 अगस्त 2026 को अपर मुख्य सचिव डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अंतिम आदेश जारी किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अनुमति के बाद जारी आदेश में दोनों कंपनियों को आवंटित पूरी 944.029 हेक्टेयर जमीन ऊर्जा विभाग में वापस निहित करने के निर्देश दिए गए।
कानपुर देहात के जिलाधिकारी को आदेश की प्रति भेजी गई है। जिलाधिकारी को राजस्व अभिलेखों यानी खतौनी में दोनों कंपनियों के नाम हटाकर जमीन को उत्तर प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज कराने की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सरकार की यह कार्रवाई लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी परियोजनाओं के लिए आवंटित जमीन के इस्तेमाल और अनुबंध की शर्तों के पालन को लेकर सख्त संदेश के तौर पर देखी जा रही है।
लैंको अनपारा को मिली थी 375.378 हेक्टेयर जमीन
28 जून 2011 को ऊर्जा विभाग और दोनों कंपनियों के बीच एग्रीमेंट हुआ था। इसके तहत लैंको अनपारा पावर लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील के कृपालपुर, चपरघटा, रसूलपुर भुरंडा और भरतौली गांवों में जमीन दी गई थी।
इसमें 90.3260 हेक्टेयर पट्टा भूमि और 285.0524 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि शामिल थी। दोनों को मिलाकर कंपनी को कुल 375.378 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई थी।
हिमावत पावर को मिली थी 568.651 हेक्टेयर जमीन
दूसरी कंपनी हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को अमिलिया, सिहारी, कछगांव और चपरघटा गांवों में जमीन दी गई थी।
इसमें 217.813 हेक्टेयर पट्टा भूमि और 350.838 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि शामिल थी। कंपनी को कुल 568.651 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई थी।
अब दोनों परियोजनाओं के लिए आवंटित यह पूरी जमीन सरकार के पक्ष में वापस दर्ज की जाएगी। करीब डेढ़ दशक तक परियोजनाओं के धरातल पर आगे नहीं बढ़ने और अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के बाद सरकार के इस फैसले से इन जमीनों के भविष्य में इस्तेमाल का रास्ता साफ हो गया है।










