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IND vs SL: सोनल दिनुषा के शतक ने भारत से छीनी जीत, खराब रणनीति और गेंदबाजी से ड्रॉ हुआ कोलंबो टेस्ट

On: August 27, 2026
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IND vs SL, सोनल दिनुषा के शतक ने भारत से छीनी जीत
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नई दिल्ली/27 अगस्त 2026: IND vs SL:भारतीय टीम के हाथ में जीत लगभग आ चुकी थी, लेकिन आखिरी दिन की रणनीति और गेंदबाजी ने पूरा खेल पलट दिया। श्रीलंका के सोनल दिनुषा ने दूसरी पारी में नाबाद 133 रन की जुझारू पारी खेलकर भारत की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उनकी इस पारी के दम पर श्रीलंका ने फॉलोऑन के बाद 429/9 रन बनाकर दूसरा टेस्ट ड्रॉ करा लिया। भारत ने हालांकि गॉल में 165 रन की जीत के कारण दो मैचों की सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली।

यह नतीजा भारत के लिए इसलिए ज्यादा चुभने वाला है क्योंकि टीम ने पहली पारी में 503/9 पर पारी घोषित की थी और श्रीलंका को सिर्फ 290 रन पर समेटकर 213 रन की बढ़त हासिल की थी। कप्तान शुभमन गिल ने फॉलोऑन का फैसला लिया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाज आखिरी चार विकेट भी नहीं निकाल सके।

IND vs SL: सोनल दिनुषा बने भारत की जीत के रास्ते की सबसे बड़ी दीवार

पांचवें दिन श्रीलंका ने 229/6 से अपनी दूसरी पारी आगे बढ़ाई। भारत को जीत के लिए केवल चार विकेट चाहिए थे। कागज पर मुकाबला एकतरफा नजर आ रहा था, मगर मैदान पर कहानी बिल्कुल अलग निकली।

दिनुषा ने केशरा नुवांथा के साथ मिलकर भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक तरसाया। दोनों ने 112 रन की साझेदारी कर भारत की बढ़ती उम्मीदों को झटका दिया। नुवांथा के आउट होने के बाद भी दिनुषा ने हार नहीं मानी। उन्होंने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर समय निकाला और धीरे-धीरे श्रीलंका को सुरक्षित स्थिति में पहुंचा दिया।

दिनुषा ने आखिरकार अपना दूसरा शतक पूरा किया। वह 264 गेंदों पर 133 रन बनाकर नाबाद रहे। यह उनके करियर की ही नहीं, इस सीरीज की भी सबसे यादगार पारियों में से एक रही। वह दूसरे टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने वाले श्रीलंका के चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हो गए।

भारतीय गेंदबाजी क्यों नहीं निकाल सकी आखिरी चार विकेट?

भारत की सबसे बड़ी समस्या यह रही कि दबाव बनाने के बावजूद गेंदबाज निर्णायक सफलता नहीं दिला सके। श्रीलंका के निचले क्रम ने जिस तरह समय बिताया, उसने भारतीय रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए।

दिनुषा ने रक्षात्मक बल्लेबाजी के साथ जरूरत के मुताबिक स्वीप और आक्रामक शॉट भी लगाए। दूसरी ओर, उनके साथ बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ियों ने भी विकेट बचाने को प्राथमिकता दी। इस मुकाबले में एक-एक गेंद की कीमत थी और श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने इसका फायदा उठाया।

लाहिरू कुमारा ने भी दिनुषा का अच्छा साथ दिया। उनकी 47 रन की साझेदारी ने श्रीलंका को उस मोड़ तक पहुंचा दिया जहां भारत के लिए समय के खिलाफ जीत हासिल करना बेहद मुश्किल हो गया। आखिर में श्रीलंका ने 429/9 पर पारी घोषित कर दी और दोनों टीमों ने हाथ मिलाकर मैच खत्म किया।

यह वही मुकाबला था जिसमें भारत ने शुरुआत में श्रीलंका पर पूरी तरह शिकंजा कस दिया था। 503 रन का विशाल स्कोर, फिर 290 पर ऑलआउट—सब कुछ भारत के पक्ष में था। लेकिन टेस्ट क्रिकेट की यही खूबसूरती और बेरहमी है: जब निचला क्रम टिक जाए और समय निकलता रहे तो बड़ी बढ़त भी जीत की गारंटी नहीं रहती।

भारत के लिए WTC की राह हुई थोड़ी मुश्किल

ड्रॉ के कारण भारत ने सीरीज तो 1-0 से जीत ली, लेकिन विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की दौड़ में उसे वह अतिरिक्त फायदा नहीं मिला जिसकी उम्मीद की जा रही थी। मौजूदा WTC चक्र में भारत पांचवें स्थान पर है और उसका पॉइंट प्रतिशत 51.52 है। टीम को फाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए आगामी मुकाबलों में लगातार जीत दर्ज करनी होगी।

यानी कोलंबो में भारत ने सीरीज गंवाई नहीं, लेकिन एक संभावित क्लीन स्वीप जरूर गंवा दिया। यही अंतर आगे चलकर WTC की गणित में बड़ा साबित हो सकता है।

सीरीज में सोनल दिनुषा का बल्ला जमकर बोला

सोनल दिनुषा इस पूरी सीरीज के सबसे बड़े खोजे गए सितारों में रहे। दूसरे टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने के अलावा उन्होंने सीरीज में लगातार प्रभावशाली पारियां खेलीं। ICC के मुताबिक यह उनका इस सीरीज का तीसरा शतक था।

गॉल में भारत ने पहला टेस्ट 165 रन से जीता था। इसके बाद उम्मीद थी कि कोलंबो में भी भारतीय टीम दबदबा कायम रखेगी और 2-0 से सीरीज खत्म करेगी। मगर दिनुषा और श्रीलंका के युवा बल्लेबाजों ने उस योजना को सफल नहीं होने दिया।

खास बात यह है कि श्रीलंका ने फॉलोऑन के बाद भारत के खिलाफ टेस्ट बचाने का कारनामा पहली बार किया। इस लिहाज से कोलंबो का ड्रॉ मेजबान टीम के लिए हार से कहीं ज्यादा बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत है।

भारत के लिए तस्वीर उलट है। सीरीज उसके नाम है, लेकिन 213 रन की बढ़त और फॉलोऑन के बाद जीत हाथ से निकलना टीम प्रबंधन के लिए आत्ममंथन का विषय जरूर होगा। टेस्ट क्रिकेट में कई बार स्कोरबोर्ड जीत की कहानी पहले ही लिख देता है, लेकिन कोलंबो ने दिखाया कि आखिरी विकेट गिरने तक मैच वास्तव में खत्म नहीं होता।

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