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नेपाल बाढ़ से गंडक में बढ़ा पानी, महराजगंज-कुशीनगर में हाई अलर्ट; वाल्मीकि बैराज के 36 फाटक खुले

On: August 27, 2026
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नेपाल बाढ़ से गंडक में बढ़ा पानी, महराजगंज-कुशीनगर में हाई अलर्ट
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गोरखपुर, 27 अगस्त 2026। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ का असर अब भारत के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचने लगा है। त्रिशूली नदी के रास्ते पानी नारायणी यानी गंडक नदी में पहुंच रहा है। इसके चलते महराजगंज और कुशीनगर के नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। वाल्मीकि बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं, जबकि देर रात तक बैराज से 2.50 लाख से तीन लाख क्यूसेक तक पानी डिस्चार्ज होने की संभावना जताई गई है।

नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए दोनों जिलों में प्रशासनिक टीमें सक्रिय कर दी गई हैं। करीब 40 किलोमीटर के भारतीय क्षेत्र में गंडक के बढ़ते प्रवाह का असर पड़ने की आशंका है। फिलहाल अधिकारियों की नजर नदी के जलस्तर और बैराज से निकलने वाले पानी पर बनी हुई है।

नेपाल बाढ़ से गंडक नदी में बढ़ा पानी

नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद पानी त्रिशूली नदी के जरिए नारायणी नदी में पहुंच रहा है। यही नदी भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद गंडक के नाम से जानी जाती है।

नेपाल से आने वाले पानी के साथ मलबा भी आने की आशंका है। ऐसे में नदी के प्रवाह और आसपास के तटबंधों पर दबाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। महराजगंज और कुशीनगर के तटवर्ती गांवों में निगरानी बढ़ाई गई है।

हालांकि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, लेकिन नदी का बहाव बढ़ने पर निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

वाल्मीकि बैराज के सभी 36 फाटक खोले गए

पानी के साथ मलबा आने की आशंका के मद्देनजर गंडक नहर प्रणाली की सभी नहरों को बंद कर दिया गया है। दूसरी ओर, वाल्मीकि बैराज के 36 फाटक खोल दिए गए हैं, ताकि नदी में बढ़ रहे पानी को नियंत्रित तरीके से आगे निकाला जा सके।

विभाग के अनुसार देर रात तक बैराज से 2.50 लाख से तीन लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने की संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2024 में बैराज से 5.62 लाख क्यूसेक पानी भी प्रवाहित हो चुका है। इस अनुभव को देखते हुए फिलहाल विभाग बैराज और तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।

इन गांवों में बढ़ाई गई निगरानी

महराजगंज जिले में सोहगीबरवा, शिकारपुर, भोथहा, शिवपुर और बसंतपुर समेत संवेदनशील गांवों में निगरानी बढ़ाई गई है। प्रशासन की टीमों ने कई जगहों पर सायरन बजाकर ग्रामीणों को सतर्क किया और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी।

कुशीनगर में डीएम महेंद्र सिंह तंवर और एसपी केशव कुमार ने नारायणी नदी के तटवर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने शिवपुर, बसंतपुर सहित अन्य प्रभावित हो सकने वाले गांवों का जायजा लेकर स्थानीय प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बाढ़ जैसी स्थिति में सबसे अहम बात यह होती है कि लोगों को अंतिम समय में नहीं, बल्कि पहले ही सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जाए। इसी वजह से प्रशासन अभी से संवेदनशील इलाकों में तैयारियां मजबूत कर रहा है।

बांधों पर अभियंता और कर्मचारियों की तैनाती

गंडक नदी पर बने बांधों की निगरानी के लिए विभागीय अभियंताओं और कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। पानी का वेग बढ़ने की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके, इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर जनरेटर भी लगाए गए हैं।

राहत कार्यों में पशुपालन, स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास और पंचायतीराज विभाग की टीमों को भी लगाया गया है। बाढ़ शरणालयों और बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि स्थिति बिगड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

सोनौली सीमा पर 12 किलोमीटर लंबी कतार

नेपाल में बाढ़ के कारण सड़क मार्ग प्रभावित होने का असर भारत-नेपाल सीमा पर भी दिखाई दे रहा है। सोनौली सीमा पर मालवाहक वाहनों की करीब 12 किलोमीटर लंबी कतार लग गई है। बताया गया है कि नारायणघाट से आगे वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।

इसका असर नेपाल जाने वाले पर्यटकों पर भी पड़ा है। कई पर्यटक रास्ते में फंसे हुए हैं, जबकि कुछ लोगों ने अपनी यात्रा स्थगित कर भारत लौटना शुरू कर दिया है। नेपाल में पहले से मौजूद भारतीयों के परिजन भी सोनौली पहुंचकर अपने स्वजन की जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं।

सीमा पर वाहनों की लंबी कतार ने दोनों देशों के बीच आवाजाही और व्यापार पर भी दबाव बढ़ा दिया है।

मुख्यमंत्री योगी ने दिए सतर्कता के निर्देश

नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ और उसके बाद गंडक के बढ़ते जलस्तर को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने महराजगंज और कुशीनगर में नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए राहत और बचाव से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी रखने को कहा है। उन्होंने नेपाल में प्रभावित लोगों की सुरक्षा की कामना करते हुए संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए।

ग्रामीण अभी क्या सावधानी बरतें?

प्रशासन ने संवेदनशील गांवों के लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। ग्रामीणों को नदी और बांध के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचने को कहा गया है।

जरूरत पड़ने पर प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित स्थानों और बाढ़ शरणालयों में जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को लेकर परिवार पहले से सतर्क रहें।

फिलहाल स्थिति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी गंडक नदी का जलस्तर और वाल्मीकि बैराज से होने वाला पानी का डिस्चार्ज है। पानी का प्रवाह बढ़ता है तो प्रशासन संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव गतिविधियों को और तेज करेगा।

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