नई दिल्ली|02 जून 2026: असम की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक माने जाने वाले मूंगा सिल्क को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मंगलवार को केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वर्चुअल माध्यम से ‘मिशन स्नेहजोरी’ का शुभारंभ किया। ₹411 करोड़ की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल असम के पारंपरिक रेशम उद्योग को आधुनिक बनाएगी, बल्कि इससे जुड़े 2.5 लाख से अधिक बुनकरों, रेशम कीट पालकों और उद्यमियों की आजीविका को भी नई मजबूती मिलेगी।
तीन वर्षों की अवधि के लिए तैयार किया गया यह मिशन वर्ष 2026 से 2028 तक लागू रहेगा। कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, कपड़ा राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और DoNER राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
मिशन स्नेहजोरी से मूंगा सिल्क पहुंचेगा वैश्विक बाजार तक
लॉन्चिंग कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मिशन का उद्देश्य मूंगा सिल्क को केवल उत्पादन केंद्रों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि असम का यह प्रसिद्ध “गोल्डन थ्रेड” भारत की पारंपरिक विरासत का अनमोल हिस्सा है और अब इसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है।
सिंधिया ने पूर्वोत्तर भारत को देश की “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए कहा कि जिस तरह विभिन्न राज्यों की अपनी विशिष्ट पहचान है, उसी तरह असम की पहचान उसके विश्वप्रसिद्ध मूंगा सिल्क से जुड़ी हुई है। उनका मानना है कि यह मिशन स्थानीय उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड में बदलने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।
11 संस्थाओं की साझेदारी से मजबूत होगी पूरी वैल्यू चेन
मिशन स्नेहजोरी की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहु-हितधारक मॉडल है। इस परियोजना में DoNER मंत्रालय, असम सरकार, कपड़ा मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय, APEDA, ICAR और DRDO सहित कुल 11 प्रमुख संस्थाएं मिलकर काम करेंगी।
परियोजना के तहत असम के विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। जोरहाट, शिवसागर, सुआलकुची, माजुली और लखीमपुर में पांच अत्याधुनिक रीलिंग इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा धेमाजी में एक समर्पित मूंगा स्पन सिल्क प्रोसेसिंग यूनिट बनाई जाएगी, जिससे मूल्य संवर्धन और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
किसानों और बुनकरों के लिए नई उम्मीद
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पहल को राज्य की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन उन हजारों किसानों और बुनकरों को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है, जो वर्षों से मूंगा सिल्क उद्योग की रीढ़ बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्पादन और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1,180 किसान रुचि समूह तथा 30 किसान उत्पादक संगठनों का गठन किया जाएगा। इससे छोटे उत्पादकों को बेहतर बाजार, प्रशिक्षण और वित्तीय अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
डिजिटल ट्रैकिंग से बढ़ेगा विदेशी खरीदारों का भरोसा
आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में किसी भी पारंपरिक उत्पाद की सफलता उसकी प्रामाणिकता पर निर्भर करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मिशन स्नेहजोरी में डिजिटल ट्रैसेबिलिटी और मजबूत जीआई ऑथेंटिकेशन सिस्टम को शामिल किया गया है।
इस तकनीक की मदद से विदेशी खरीदार भी यह सत्यापित कर सकेंगे कि उत्पाद वास्तव में असम का असली मूंगा सिल्क है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में असमिया मूंगा सिल्क की विश्वसनीयता और मांग दोनों बढ़ेंगी।
असम की विरासत को मिलेगा नया आयाम
कार्यक्रम के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से जुड़े बुनकरों, रेशम कीट पालकों और उद्यमियों ने वर्चुअल माध्यम से अपने अनुभव साझा किए। साथ ही मूंगा सिल्क की समृद्ध विरासत और उसके ऐतिहासिक महत्व पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिशन स्नेहजोरी केवल एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का एक व्यापक प्रयास है। यदि योजना निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में असम विश्व स्तर पर मूंगा सिल्क के सबसे प्रमुख केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकता है।












