नई दिल्ली (05 मई 2026): देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने और किसानों से लेकर टेक्नोलॉजी सेक्टर तक मजबूत आधार तैयार करने के लिए मोदी सरकार की ₹1,52,000 करोड़ की योजनाएं अब जमीन पर उतरने की तैयारी में हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिनका सीधा असर कृषि, उद्योग और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन पर पड़ेगा।
सरकार का यह कदम सिर्फ एक आर्थिक पैकेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है—जहां खेत से लेकर चिप फैक्ट्री तक, हर स्तर पर आत्मनिर्भरता की दिशा में जोर दिया गया है।
कपास क्रांति से किसानों को नई दिशा
मोदी सरकार की ₹1,52,000 करोड़ की योजनाएं में सबसे ज्यादा चर्चा ‘कपास क्रांति’ (Cotton Revolution) की हो रही है। इस पहल के तहत देश के करीब 32 लाख कपास किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।
भारत पहले ही 297 लाख बेल्स उत्पादन के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक है, लेकिन 2030-31 तक मांग बढ़कर 450 लाख बेल्स तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में सरकार ने 5,669 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसका फोकस रिसर्च, आधुनिक उत्पादन तकनीक और नए फाइबर अपनाने पर रहेगा।
यह योजना केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय में स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम है।
गन्ना किसानों को सीधा फायदा, बढ़ा MSP
सरकार ने गन्ना किसानों के लिए भी बड़ा फैसला लेते हुए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह दर उत्पादन लागत के मुकाबले काफी अधिक है और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से तय की गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस फैसले से किसानों को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का सीधा लाभ मिलेगा। 10.25% रिकवरी दर के आधार पर तय यह मूल्य किसानों के लिए राहत के साथ-साथ स्थिर आय का भरोसा भी देता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ाने के लिहाज से यह निर्णय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर को बूस्ट
मोदी सरकार की ₹1,52,000 करोड़ की योजनाएं में टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी खास प्राथमिकता दी गई है। कैबिनेट ने 1,570 करोड़ रुपये के दो नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है।
इन परियोजनाओं का मकसद भारत को वैश्विक चिप निर्माण (Semiconductor Manufacturing) में एक मजबूत खिलाड़ी बनाना है। इसके साथ ही गुजरात के वडिनार में 18,000 करोड़ रुपये की शिप रिपेयर सुविधा को भी हरी झंडी दी गई है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
इमरजेंसी क्रेडिट स्कीम से उद्योगों को राहत
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय उद्योगों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
यह स्कीम खासतौर पर उन सेक्टर्स के लिए राहत लेकर आएगी जो अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से प्रभावित हो रहे हैं।
10 बड़े फैसलों में ‘मेक इन इंडिया’ का मजबूत संदेश
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन 10 फैसलों में कृषि, टेक्नोलॉजी, ज्यूडिशियरी और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट जैसे कई क्षेत्रों को कवर किया गया है।
स्पष्ट है कि मोदी सरकार की ₹1,52,000 करोड़ की योजनाएं सिर्फ अल्पकालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास का रोडमैप हैं। यह पैकेज भारत को आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।













