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यूपी-बिहार समेत 12 राज्यों के 315 जिलों में सूखे का खतरा, अलनीनो और कमजोर मानसून ने बढ़ाई चिंता

On: June 23, 2026
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यूपी-बिहार समेत सूखे का खतरा, अलनीनो और कमजोर मानसून ने बढ़ाई चिंता
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नई दिल्ली/23 जून 2026: देश में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। अलनीनो के संभावित प्रभाव और मानसून की सुस्त रफ्तार ने कई राज्यों में वर्षा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ताजा स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने माना है कि उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 12 राज्यों के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। ऐसे में इन इलाकों में सूखे का खतरा भी गहराने लगा है।

खेती-किसानी पर निर्भर ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम की यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। खासकर उन जिलों में जहां सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं, वहां किसानों की नजरें अब आसमान पर टिकी हुई हैं।

111 जिलों को उच्च प्राथमिकता में रखा गया

कृषि मंत्रालय के अनुसार 315 संवेदनशील जिलों में से 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में सिंचाई की उपलब्धता लगभग 25 प्रतिशत तक ही है, जिससे वर्षा में कमी का सीधा असर खेती पर पड़ सकता है।

इसके अलावा 76 जिलों को मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में शामिल किया गया है, जहां करीब 50 प्रतिशत सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। वहीं 128 जिले अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं, जहां बांधों, नहरों और अन्य जल स्रोतों के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था मौजूद है।

इन जिलों का संबंध मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों से है।

बारिश में 43 प्रतिशत तक कमी, दो जुलाई तक राहत के संकेत नहीं

मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देश में अब तक सामान्य की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए दो जुलाई तक बारिश की कमी की स्थिति बनी रह सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार नहीं बढ़ी तो वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में बोआई और फसल विकास प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी शुरू कर दी है।

संवेदनशील जिलों के लिए तैयार हुई आकस्मिक कृषि योजना

कृषि मंत्रालय ने सभी संवेदनशील जिलों के लिए अलग-अलग कृषि आकस्मिकता योजनाएं तैयार की हैं। इन योजनाओं में स्थानीय जलवायु, उपलब्ध जल संसाधन, फसल पैटर्न और क्षेत्रीय जोखिमों को ध्यान में रखा गया है।

कम वर्षा की स्थिति में किसानों को वैकल्पिक फसलों की सलाह, फसल परिवर्तन की रणनीति, सीमित पानी के बेहतर उपयोग और आय संरक्षण के उपायों पर विशेष जोर दिया जाएगा। उद्देश्य यह है कि कमजोर मानसून की स्थिति में भी किसानों को न्यूनतम नुकसान हो।

अलनीनो निगरानी सेल और क्रॉप वेदर वाच ग्रुप सक्रिय

सरकार ने मौसम की बदलती परिस्थितियों पर नजर रखने के लिए कृषि मंत्रालय के अलनीनो निगरानी सेल और क्रॉप वेदर वाच ग्रुप को सक्रिय कर दिया है। सचिव स्तर पर नियमित साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है, जबकि कृषि मंत्री स्वयं हालात की निगरानी कर रहे हैं।

सरकार का मानना है कि यदि समय रहते जल प्रबंधन और कृषि रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो संभावित सूखे के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

राज्यों को जल संरक्षण और किसानों तक संसाधन पहुंचाने के निर्देश

केंद्र सरकार ने राज्यों को तालाबों, जलाशयों, खेत-तालाबों, चेक डैम, नालों और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने को कहा है।

साथ ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि खरीफ सीजन के लिए बीज, यूरिया और अन्य आवश्यक उर्वरक समय पर किसानों तक पहुंचें। जरूरत पड़ने पर किसानों को ऋण, सहायता और राहत राशि भी तत्काल उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

मानसून की अगली चाल पर अब करोड़ों किसानों की उम्मीदें टिकी हैं। यदि आने वाले दिनों में बारिश की रफ्तार नहीं बढ़ी, तो कई राज्यों में कृषि क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

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