18 मई 2026|नांदेड़/लातूर (महाराष्ट्र): देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। अब तक छात्रों, सॉल्वर गैंग और बिचौलियों तक सीमित रही जांच सीधे अभिभावकों के दरवाजे तक पहुंच गई है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने महाराष्ट्र के नांदेड़ और लातूर में कई परिवारों से पूछताछ कर यह संकेत दे दिया है कि एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की तैयारी में है।
सूत्रों के मुताबिक, CBI की आठ सदस्यीय टीम ने शनिवार और रविवार को नांदेड़ के विद्युत नगर समेत कई इलाकों में तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी को संदेह है कि कुछ संपन्न परिवारों ने अपनी बेटियों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के लिए लीक प्रश्नपत्र खरीदने में लाखों रुपये खर्च किए।
NEET पेपर लीक मामला: 5 से 25 लाख रुपये तक के लेन-देन की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, अभिभावकों ने कथित तौर पर बिचौलियों को 5 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक की रकम दी थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल पेपर लीक कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें पेपर हल करने वाले, कोचिंग संपर्क और आर्थिक लेन-देन की कई परतें शामिल थीं।
CBI अधिकारियों ने नांदेड़ में एक छात्रा के परिवार से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। एजेंसी ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और बैंकिंग लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की। आरोप है कि छात्रा के व्यवसायी पिता ने करीब 10 लाख रुपये देकर लीक पेपर हासिल किया था। इसमें 5 लाख रुपये एक बिचौलिए और बाकी रकम दूसरे व्यक्ति को दिए जाने की बात सामने आई है।
कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच की आंच अब निजी कोचिंग संस्थानों तक भी पहुंचती दिख रही है। नांदेड़ के AIB नामक एक कोचिंग संस्थान का नाम जांच में सामने आया है। संस्थान ने परीक्षा परिणाम आने से पहले ही कुछ छात्रों के बड़े-बड़े फ्लेक्स और “The Results To Come” जैसी टैगलाइन वाले बैनर लगाए थे, जिसने एजेंसियों का ध्यान खींचा।
संस्थान संचालक अतुल मोरे ने हालांकि किसी भी गैरकानूनी गतिविधि से इनकार किया है। उनका कहना है कि संबंधित छात्रा उनके यहां पढ़ती थी, लेकिन पिछले 15 दिनों से उसका संस्थान से कोई संपर्क नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रा मॉक टेस्ट में 400 से 450 अंक तक हासिल करती थी।
नांदेड़ से लातूर तक फैला था नेटवर्क
CBI को शक है कि कुछ अभिभावकों ने खुद पैसे देकर पेपर हासिल करने के बाद उसे अन्य लोगों तक भी पहुंचाया, ताकि अपनी रकम का हिस्सा वापस लिया जा सके। जांचकर्ताओं का मानना है कि पुणे, नांदेड़, लातूर और आसपास के जिलों में एक सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय था, जो परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता को कमजोर कर रहा था।
एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे खेल में किन-किन लोगों ने जानबूझकर फायदा उठाया और पैसा किस रास्ते से कहां तक पहुंचा। मामले में कई गिरफ्तारियां पहले ही हो चुकी हैं, जिनमें कथित मास्टरमाइंड, सॉल्वर और बिचौलिए शामिल हैं।
बढ़ सकती है कार्रवाई, और छापों की तैयारी
वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में महाराष्ट्र के अन्य जिलों में भी छापेमारी हो सकती है। CBI यह भी जांच रही है कि क्या इसी तरह के लेन-देन दूसरे राज्यों तक भी फैले हुए थे। एजेंसी फिलहाल हर उस व्यक्ति की भूमिका खंगाल रही है, जिसने किसी भी स्तर पर लीक प्रश्नपत्र से लाभ उठाने की कोशिश की।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेडिकल सीट की होड़ में बढ़ते दबाव और करोड़ों के खेल ने अब अभिभावकों को भी जांच एजेंसियों के रडार पर ला दिया है।









