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भारत की 38 देशों से फ्री ट्रेड डील, निर्यात के लिए खुला बड़ा वैश्विक बाजार; पीयूष गोयल ने बताया 1 लाख करोड़ डॉलर का लक्ष्य

On: May 18, 2026
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निर्यात के लिए खुला बड़ा वैश्विक बाजार, पीयूष गोयल ने बताया 1 लाख करोड़ डॉलर का लक्ष्य
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नई दिल्ली, 18 मई 2026 (सोमवार)। भारत अब वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाने की तैयारी में है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एक लाख करोड़ डॉलर के निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इतना ही नहीं, अगले पांच वर्षों में इस आंकड़े को बढ़ाकर दो लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है। सरकार का मानना है कि भारत की 38 देशों के साथ हुई फ्री ट्रेड डील (FTA) भारतीय उद्योगों और निर्यातकों के लिए बड़े अवसर लेकर आई है।

नई दिल्ली में भारतीय व्यापार महोत्सव पोर्टल के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित अर्थव्यवस्था नहीं रह गया है, बल्कि दुनिया के बड़े व्यापारिक नेटवर्क का तेजी से हिस्सा बन रहा है।

भारत की फ्री ट्रेड डील से खुला बड़ा बाजार

पीयूष गोयल ने कहा कि 38 देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों का सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। इन समझौतों के जरिए भारतीय उत्पादों को कई देशों में कम शुल्क या आसान व्यापारिक शर्तों के साथ बाजार उपलब्ध होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्री ट्रेड डील का सबसे बड़ा लाभ टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उत्पाद और सेवा क्षेत्र को मिल सकता है। भारत की कोशिश है कि वह चीन पर निर्भर वैश्विक सप्लाई चेन का एक मजबूत विकल्प बनकर उभरे।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात 863 अरब डॉलर रहा। अब इसे अगले चरण में एक ट्रिलियन डॉलर यानी एक लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का जोर

पीयूष गोयल ने कार्यक्रम में उद्योग जगत और उद्यमियों से अपील की कि वे आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू स्तर पर उत्पादन शुरू करें। उन्होंने कहा कि भारत को केवल असेंबलिंग आधारित अर्थव्यवस्था नहीं बने रहना चाहिए, बल्कि संपूर्ण निर्माण क्षमता विकसित करनी होगी।

उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय की वेबसाइट पर उन वस्तुओं की जानकारी उपलब्ध है जिनका बड़े पैमाने पर आयात हो रहा है। उद्यमी इन आंकड़ों का अध्ययन करके नए विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश कर सकते हैं।

गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब भारत को “मेड इन इंडिया” से आगे बढ़कर “मेड बाय इंडिया” की दिशा में काम करना होगा।

पश्चिम एशिया संकट का भी दिखा असर

वाणिज्य मंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने दुनिया की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में भारत को अपने घरेलू उद्योगों को और मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यदि भारतीय उपभोक्ता विदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देंगे तो इसका सीधा नुकसान देश के उद्योगों और रोजगार पर पड़ेगा। इसलिए स्थानीय उत्पादों के उपयोग और उत्पादन दोनों को बढ़ावा देना जरूरी है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि हाल के वर्षों में दुनिया भर में “लोकल मैन्युफैक्चरिंग” और “सप्लाई चेन सिक्योरिटी” पर जोर बढ़ा है। भारत इसी बदलते वैश्विक माहौल का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।

कैपिटल गुड्स सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी

पीयूष गोयल ने कहा कि कैपिटल गुड्स यानी मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों के मामले में भारत अभी भी काफी हद तक आयात पर निर्भर है। उन्होंने राजकोट, जालंधर, लुधियाना और पुणे जैसे प्रमुख औद्योगिक क्लस्टरों से इस क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया।

सरकार का मानना है कि यदि भारत कैपिटल गुड्स सेक्टर में मजबूत होता है तो इससे न केवल आयात घटेगा बल्कि देश का विनिर्माण ढांचा भी और सशक्त होगा।

गुणवत्ता ही बनेगी भारतीय उत्पादों की पहचान

कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने गुणवत्ता को भारतीय निर्यात की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में टिकने के लिए केवल कम कीमत पर्याप्त नहीं है, बल्कि उच्च गुणवत्ता और भरोसेमंद उत्पादन भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पाद तभी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना पाएंगे जब उत्पादन के हर स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। सरकार इसी दिशा में उद्योगों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने पर जोर दे रही है।

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अहम संकेत

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का निर्यात लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह देश की वैश्विक आर्थिक महत्वाकांक्षा को भी दर्शाता है। फ्री ट्रेड डील, घरेलू उत्पादन और गुणवत्ता आधारित विनिर्माण पर सरकार का फोकस आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक व्यापार का बड़ा केंद्र बना सकता है।

यदि सरकार अपने तय लक्ष्यों तक पहुंचने में सफल रहती है तो इससे रोजगार, निवेश, विदेशी मुद्रा भंडार और औद्योगिक विकास को बड़ी गति मिल सकती है। ऐसे में पीयूष गोयल का यह रोडमैप भारत की अर्थव्यवस्था के अगले चरण की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

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