नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच भारत ने पड़ोसी देश की मदद के लिए राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। भारत की ओर से अब तक राहत सामग्री लेकर तीन विमान नेपाल भेजे जा चुके हैं। तीसरे विमान में 10 टन मानवीय सहायता के साथ डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए रेकी टीम को भी रवाना किया गया है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने नेपाल को एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम और जरूरी उपकरण भेजने का प्रस्ताव भी दिया है। हालांकि, शुक्रवार देर शाम तक नेपाल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर अंतिम मंजूरी का इंतजार था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल को जिस भी अतिरिक्त मदद की जरूरत होगी, भारत उसे उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
नेपाल बाढ़ में भारत की मदद बढ़ी, तीसरे विमान में 10 टन राहत सामग्री
भारत की ओर से भेजे गए तीसरे विमान में पोर्टेबल जनरेटर सेट, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और पानी शुद्ध करने वाली गोलियां शामिल हैं। इसके साथ 11 सदस्यीय टीम भी भेजी गई है, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिक्स और सुरंग में बचाव अभियान के लिए रेकी टीम के सदस्य शामिल हैं।
इससे पहले बुधवार को 10 टन एचएडीआर (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) सामग्री नेपाल भेजी गई थी। गुरुवार को दूसरी खेप में 37.5 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई। इस तरह तीसरी खेप को मिलाकर भारत अब तक करीब 57.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है।
राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाओं जैसी जरूरी वस्तुएं भी शामिल हैं। जरूरत को देखते हुए आने वाले दिनों में और सहायता भेजे जाने की तैयारी है।
सुरंग में फंसे लोगों के लिए भारत ने तैयार की विशेष टीम
नेपाल की ओर से सुरंग में फंसे लोगों को निकालने में सहायता मांगे जाने के बाद भारत ने टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी की है। इसके लिए पहले रेकी टीम मौके की स्थिति का आकलन करेगी और यह देखा जाएगा कि बचाव अभियान के लिए किस तरह के उपकरणों की आवश्यकता होगी।
इसके साथ भारत मेडिकल टीम भी भेज रहा है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रभावित इलाकों में संपर्क व्यवस्था बहाल करने के लिए बेली ब्रिज और तकनीकी टीम उपलब्ध कराने की पेशकश भी नेपाल के सामने रखी गई है। भारत में मौजूद एक बेली ब्रिज को भी जरूरत पड़ने पर राहत कार्यों में लगाया जा सकता है।
एनडीआरएफ टीम भेजने का प्रस्ताव, नेपाल के जवाब का इंतजार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने नेपाल अधिकारियों को एनडीआरएफ की टीमों के साथ उनके जरूरी उपकरण भेजने का विशिष्ट प्रस्ताव दिया है। इन टीमों का इस्तेमाल चल रहे खोज और बचाव अभियान में किया जा सकता है।
हालांकि, नेपाल की सरकार फिलहाल बड़े पैमाने पर विदेशी बचाव दलों की मदद लेने को लेकर सतर्क है। रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल का कहना है कि उसके सुरक्षा बल और स्थानीय तंत्र मौजूदा बचाव अभियान को संभालने में सक्षम हैं। जहां अतिरिक्त तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होगी, वहां बाहरी मदद लेने पर फैसला किया जाएगा।
नेपाल के इस रुख के पीछे वर्ष 2015 के भूकंप के बाद का अनुभव भी एक वजह माना जा रहा है। उस समय बड़ी संख्या में विदेशी एजेंसियां राहत अभियान में पहुंची थीं और उनके बीच बेहतर समन्वय की कमी को लेकर सवाल उठे थे। इसलिए इस बार नेपाल सरकार स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों की क्षमता पर अधिक भरोसा कर रही है।
नेपाल में चीन की भी सक्रियता, लेकिन भारत ने कूटनीतिक अटकलों से दूरी रखी
बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित सीमा क्षेत्र में चीन की ओर से भी राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। चीनी सरकारी मीडिया में तिब्बत के गिरोंग (केरुंग) क्षेत्र में पीएलए और आपातकालीन टीमों की तैनाती तथा राहत सामग्री पहुंचाने की तस्वीरें सामने आई हैं।
इस बीच कुछ कूटनीतिक हलकों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि नेपाल की ओर से विदेशी बचाव दलों को लेकर बरती जा रही सावधानी के पीछे बाहरी दबाव की भूमिका तो नहीं है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक बयानों के आधार पर इसे किसी दबाव का नतीजा कहना जल्दबाजी होगी। नेपाल ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह अपनी जरूरत और स्थानीय सुरक्षा बलों की सलाह के आधार पर विदेशी सहायता को लेकर फैसला कर रहा है।
भारत की प्राथमिकता राहत के साथ फंसे नागरिकों की सुरक्षित वापसी
नेपाल में आई आपदा के बीच भारत के लिए राहत अभियान के साथ अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी भी अहम प्राथमिकता बनी हुई है। भारत ने नेपाल के साथ संपर्क और बचाव प्रयासों में समन्वय बढ़ाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा है कि भारत नेपाल में चल रहे राहत एवं बचाव अभियानों में सहयोग जारी रखेगा।
यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के बढ़ते खतरे की ओर भी ध्यान खींच रही है। नेपाल और तिब्बत सीमा के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़कें, पुल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होने से राहत दलों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना खुद एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में राहत सामग्री के साथ मेडिकल, टनल रेस्क्यू और कनेक्टिविटी बहाली के लिए तकनीकी सहायता भारत की मदद को अधिक व्यापक बनाती है।












