नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक को लेकर सामने आई सड़न की खबरों को खारिज किया है। उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने कहा कि सरकार के पास मौजूद 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक अच्छी गुणवत्ता का है और इसका करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सड़ने की बात सही नहीं है।
इस बार सरकार ने प्याज के भंडारण की व्यवस्था में भी बदलाव किया है। बेहतर शेल्फ लाइफ और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पहली बार केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) को स्टॉक के भंडारण की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, एक तीसरी पार्टी नियमित अंतराल पर भंडारित प्याज की गुणवत्ता का आकलन कर रही है।
प्याज का बफर स्टॉक सुरक्षित, सड़ने की खबरों का खंडन
निधि खरे ने बताया कि पिछले वर्षों में बफर स्टॉक का प्याज व्यापारियों के पास रखा जाता था, लेकिन इस वर्ष इसकी जिम्मेदारी CWC को दी गई है। इससे भंडारण की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है।
उन्होंने प्याज के भंडारण की प्रकृति समझाते हुए कहा कि इसमें करीब 90 प्रतिशत पानी होता है। कटाई के बाद लगभग तीन महीने तक प्याज अपनी गुणवत्ता बनाए रखता है। इसके बाद प्राकृतिक रूप से पानी कम होने के कारण प्याज का वजन और आकार घटने लगता है। भंडारण की स्थिति, तापमान और वेंटिलेशन का सड़न पर सीधा असर पड़ता है।
सरकार के अनुसार, इस वर्ष प्याज की रिकवरी करीब 72 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले बेहतर स्थिति है। वर्ष 2022 में रिकवरी 49 प्रतिशत, 2023 में 54 प्रतिशत और 2024 में 63 प्रतिशत रही थी।
बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है।
दिल्ली पहुंची 453.65 टन प्याज की पहली खेप
प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक को देश के प्रमुख शहरों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है। इसके लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए प्याज की आपूर्ति की जा रही है।
शुक्रवार को 21 वैगन वाली पहली कांदा एक्सप्रेस दिल्ली पहुंची, जिसमें 453.65 टन प्याज लदा था। उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे के मुताबिक, यह प्याज नासिक से दिल्ली-एनसीआर लाया गया है।
सरकार को उम्मीद है कि बफर स्टॉक की अतिरिक्त आपूर्ति से दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी। इसका असर खुदरा कीमतों पर भी दिखाई देने की संभावना है और आने वाले एक सप्ताह में दाम नीचे आने की उम्मीद जताई गई है।
35 रुपये किलो की दर से मिलेगा प्याज
नासिक से दिल्ली लाए गए बफर स्टॉक के प्याज को 35 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी दर पर बेचा जाएगा। मांग और जरूरत के मुताबिक इसका कुछ हिस्सा चंडीगढ़, लुधियाना और जम्मू जैसे आसपास के शहरों में भी भेजा जाएगा।
इसके अलावा बफर स्टॉक को दिल्ली के साथ चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे शहरों में भी भेजा जा रहा है। मकसद साफ है—जहां खुदरा बाजार में कीमतें ज्यादा बढ़ रही हैं, वहां सरकारी स्टॉक के जरिए आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम किया जाए।
प्याज की कीमतों का मुद्दा सरकारों के लिए हमेशा संवेदनशील रहा है। रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली इस सब्जी की कीमत में तेज बढ़ोतरी सीधे घरेलू बजट पर असर डालती है। यही वजह है कि केंद्र सरकार बफर स्टॉक को बाजार में उतारने के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता और वितरण पर भी निगरानी बढ़ा रही है।
दिल्ली में प्याज 62 रुपये किलो, औसत खुदरा भाव 46.58 रुपये
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को दिल्ली में प्याज का खुदरा मूल्य 62 रुपये प्रति किलोग्राम था। एक वर्ष पहले इसी दिन यह कीमत 33 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी सालाना आधार पर दिल्ली में प्याज के खुदरा दाम में करीब 88 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
देशभर की बात करें तो इसी दिन प्याज का औसत खुदरा मूल्य 46.58 रुपये प्रति किलोग्राम और औसत थोक मूल्य 38.29 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।
हालांकि, सरकार का कहना है कि कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी के बावजूद आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त है।
आगे खरीफ और रबी फसल से उम्मीद
सरकार ने आगामी फसल को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। उपभोक्ता मामले सचिव ने रबी फसल पर अलनीनो के संभावित प्रभाव को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि परिस्थितियां अनुकूल हैं।
सिंचाई व्यवस्था में सुधार और प्रमुख जलाशयों में संतोषजनक जल स्तर को भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में प्याज की आपूर्ति को लेकर फिलहाल बड़ी चिंता नहीं बताई जा रही है।
उत्पादन के आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष उत्पादन करीब 307.67 लाख टन रहा था। यानी उत्पादन में बहुत बड़ा अंतर नहीं है।
फिलहाल सरकार की रणनीति दो मोर्चों पर काम करती दिख रही है—एक तरफ बफर स्टॉक को उन बाजारों तक पहुंचाना जहां कीमतें ज्यादा हैं और दूसरी तरफ आने वाली फसल से आपूर्ति को मजबूत बनाए रखना। ऐसे में आने वाले दिनों में दिल्ली समेत बड़े शहरों में प्याज की कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकारी स्टॉक कितनी तेजी से बाजार तक पहुंचता है और नई फसल की आवक कैसी रहती है।












