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‘स्मार्टफोन से दूरी, अच्छी किताबों से दोस्ती’, सीएम योगी ने छात्राओं को बताया सफलता का मंत्र

On: August 28, 2026
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सीएम योगी ने छात्राओं को बताया सफलता का मंत्र
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लखनऊ, 28 अगस्त 2026। रक्षाबंधन के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान स्कूली छात्राओं ने खुलकर अपनी बातें रखीं। किसी ने पढ़ाई और सुविधाओं का जिक्र किया तो किसी ने भविष्य के सपनों की बात कही। इसी संवाद के दौरान एक छात्रा ने सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर सवाल किया। जवाब में मुख्यमंत्री ने तकनीक को पूरी तरह छोड़ने के बजाय जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करने और अच्छी किताबों को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी।

‘बिटिया और बहना-यूपी का गहना’ स्नेहबंधन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तकनीक शिक्षा और जानकारी हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन जब किसी तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता बढ़ जाती है तो वह समय के साथ सोचने-समझने और रचनात्मकता को भी प्रभावित कर सकती है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल पढ़ाई, डिजिटल लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी उपयोगी जरूरतों तक सीमित रखना बेहतर है।

स्मार्टफोन से दूरी क्यों जरूरी, सीएम योगी ने छात्राओं को समझाया

द संस्कृति स्कूल लखनऊ की कक्षा आठ की छात्रा श्रेयशी सिंह ने मुख्यमंत्री से पूछा कि सोशल मीडिया के दौर में विद्यार्थियों के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। इंटरनेट पर अच्छी सामग्री के साथ ऐसी चीजें भी सामने आती हैं, जो बच्चों का ध्यान भटका सकती हैं। ऐसे में विद्यार्थी सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई और अपने लक्ष्य पर ध्यान कैसे केंद्रित करें?

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सफलता के लिए सबसे पहले अच्छी सोच विकसित करना जरूरी है। तकनीक का इस्तेमाल भी आवश्यकता के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन आज की पीढ़ी का काफी समय ले रहा है। यदि किसी मशीन या तकनीक पर निर्भरता इतनी बढ़ जाए कि हमारी अपनी सोच और रचनात्मक क्षमता कमजोर पड़ने लगे, तो उस निर्भरता को कम करना जरूरी है।

योगी ने कैलकुलेटर का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय लोग बिना कैलकुलेटर के गिनती, पहाड़े और गणित के सवाल आसानी से हल कर लेते थे। तकनीक के अत्यधिक इस्तेमाल के साथ धीरे-धीरे ऐसी क्षमताओं पर निर्भरता बढ़ी। इसी तरह स्मार्टफोन भी उपयोगी है, लेकिन उसका इस्तेमाल विवेक के साथ होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर हर चीज बच्चों के लिए उपयोगी नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्टफोन को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। इसका उपयोग डिजिटल लाइब्रेरी, ऑनलाइन शिक्षा, पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किया जा सकता है।

लेकिन इंटरनेट पर मौजूद हर सामग्री विद्यार्थी के हित में हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया और स्मार्टफोन पर समय बिताने की एक सीमा तय करनी चाहिए। अनावश्यक कंटेंट से दूरी बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने बच्चों को चेताते हुए कहा कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर असर पड़ सकता है और अत्यधिक इस्तेमाल सोचने-समझने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। जो बच्चे रोजाना चार से छह घंटे स्मार्टफोन पर बिताते हैं, उन्हें धीरे-धीरे अपना स्क्रीन टाइम कम करने का प्रयास करना चाहिए।

अच्छी किताबें पढ़ने की आदत डालें, व्यक्तित्व भी निखरेगा

सीएम योगी ने छात्राओं से कहा कि पाठ्यक्रम की किताबों के साथ-साथ अच्छी और प्रेरणादायी पुस्तकों को पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए। किताबें केवल परीक्षा की तैयारी का माध्यम नहीं हैं। वे सोचने का तरीका बदलती हैं, भाषा को समृद्ध करती हैं और व्यक्तित्व के विकास में मदद करती हैं।

उन्होंने बच्चों को पढ़ने के साथ लिखने की आदत डालने की भी सलाह दी। उनका कहना था कि अच्छी पुस्तकों का अध्ययन और नियमित लेखन ज्ञान के साथ अभिव्यक्ति की क्षमता को भी मजबूत करता है।

मुख्यमंत्री ने छात्राओं से अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि वह स्वयं भी स्मार्टफोन का बहुत सीमित इस्तेमाल करते हैं। उनके मुताबिक, वे मुश्किल से करीब आधा घंटा स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं और वह भी राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों या जरूरी काम के लिए। उनका मानना है कि स्मार्टफोन पर ज्यादा समय देने से प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करने के लिए उपलब्ध समय प्रभावित हो सकता है।

रक्षाबंधन पर छात्राओं ने सीएम योगी को बांधी राखी

कार्यक्रम में स्कूली छात्राओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तिलक लगाकर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने भी बच्चियों को उपहार स्वरूप चॉकलेट और ओडीओपी बैग दिए। एक छात्रा के आग्रह पर उन्होंने उसकी पॉकेट डायरी पर संदेश भी लिखा।

इस दौरान 75 जनपदों की छात्राओं की वीडियो क्लिप भी प्रदर्शित की गई। अलग-अलग जिलों की छात्राओं ने अपना परिचय देते हुए मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और राखी भेजने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्राओं का इस तरह बिना झिझक संवाद करना उत्तर प्रदेश में आए बदलाव को दिखाता है। उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले बेटियों को सुरक्षित और उन्मुक्त वातावरण में मुख्यमंत्री से सीधे संवाद करने का ऐसा अवसर सहज नहीं था। आज बड़ी संख्या में छात्राएं मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर अपनी बात रख रही हैं और सवाल पूछ रही हैं।

2017 से पहले बेटियों की पढ़ाई को लेकर अभिभावकों को रहती थी चिंता

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में कई परिवार बेटियों को स्कूल भेजने को लेकर चिंतित रहते थे। सुरक्षा की चिंता के कारण कुछ अभिभावक उनकी पढ़ाई रोक देते थे, जबकि कुछ को बेटियों को दूसरे प्रदेशों के हॉस्टल में भेजना पड़ता था।

मुख्यमंत्री के अनुसार, आज परिस्थितियों में बदलाव आया है और बेटियां सुरक्षित वातावरण में शिक्षा हासिल कर रही हैं। सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी उच्च शिक्षा तक अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, छात्रवृत्ति और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटियों को शिक्षा और स्वावलंबन के लिए लगातार अवसर दिए जा रहे हैं। स्नातक स्तर की 50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की योजना का भी उन्होंने जिक्र किया।

महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ने का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस में महिला कर्मियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। उनके अनुसार, 2017 से पहले करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब 45 हजार हो गई है और जल्द ही 50 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि बेटियों को सुरक्षित वातावरण देने और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने का असर समाज के दूसरे क्षेत्रों में भी दिखाई देता है। आज बेटियां खेल, शिक्षा, प्रशासन, पुलिस और दूसरे पेशों में अपनी पहचान बना रही हैं।

‘मुझे भी आपके जैसा नेता बनना है’, छात्रा ने सीएम से कहा

कार्यक्रम में छात्राओं ने मुख्यमंत्री के सामने अपने सपनों की झलक भी दिखाई। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मलिहाबाद की कक्षा नौ की छात्रा वैष्णवी पाल ने कहा कि टीवी पर मुख्यमंत्री को देखकर उसके मन में भी उनकी तरह नेता बनने की इच्छा पैदा हुई।

वैष्णवी हॉकी खिलाड़ी है और राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित होने की बात उसने मुख्यमंत्री को बताई। वहीं इसी विद्यालय की दिव्या ने कहा कि पहले उसके स्कूल में कक्षा आठ तक ही पढ़ाई होती थी, लेकिन अब नौवीं से 12वीं तक की शिक्षा की सुविधा मिलने से वह खुश है। वह फुटबॉल में राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है।

कक्षा सात की अंजावती सिंह ने भी मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। उसने बताया कि वह हॉकी और कराटे खेलती है और हॉकी में राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित हुई है। कराटे में राज्य स्तर पर कांस्य पदक हासिल करने की जानकारी भी उसने साझा की।

पायनियर मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज की कक्षा आठ की छात्रा समृद्धि वर्मा ने मुख्यमंत्री से आमने-सामने मिलने को अपने लिए खास अवसर बताया। उसने कहा कि वह बचपन से मुख्यमंत्री को टीवी पर देखती थी और उनसे सीधे मिलने की इच्छा रक्षाबंधन पर पूरी हुई।

इस पूरे संवाद में एक बात खास रही—बेटियों ने सिर्फ योजनाओं की तारीफ नहीं की, बल्कि सवाल भी पूछे और अपने सपने भी बताए। मुख्यमंत्री ने भी उन्हें पढ़ाई, अनुशासन, तकनीक के संतुलित इस्तेमाल और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया। यही संवाद बदलते उत्तर प्रदेश में बेटियों की बढ़ती आत्मविश्वास भरी भागीदारी की एक तस्वीर पेश करता है।

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