नई दिल्ली/12 जुलाई 2026: अगर आप पहली बार वोटर कार्ड बनवाने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने स्पष्ट किया है कि अब मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने वाले नए आवेदकों को भी अपने माता-पिता की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य होगा। आयोग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य मतदाताओं की पहचान और रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाना है।
यह नया प्रावधान केवल पुराने मतदाताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फॉर्म-6 के जरिए नए वोटर कार्ड के लिए आवेदन करने वाले सभी पात्र नागरिकों पर भी लागू होगा।
फॉर्म-6 के साथ देना होगा SIR से जुड़ा घोषणा-पत्र
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरने वाले नए आवेदकों को अब अपने माता-पिता की SIR प्रक्रिया से संबंधित जानकारी देना अनिवार्य होगा। इसके लिए आवेदन के साथ एक घोषणा-पत्र भी जमा करना होगा।
हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 के प्रारूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह घोषणा-पत्र केवल प्रशासनिक निर्देशों के माध्यम से जोड़ा गया है। यह व्यवस्था पिछले वर्ष बिहार में शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान भी लागू की गई थी।
ऑनलाइन आवेदन में भी बिना घोषणा-पत्र आगे नहीं बढ़ेगी प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म-6 भरता है, तो माता-पिता की SIR संबंधी घोषणा दिए बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकेगी।
आयोग का कहना है कि इस व्यवस्था से मतदाताओं की मैपिंग अधिक सटीक होगी और नए आवेदकों को अलग-अलग दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता भी कम पड़ेगी। इससे मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और प्रमाणिक बनाने में मदद मिलेगी।
आयोग ने बताया क्यों जरूरी है यह बदलाव
निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल अतिरिक्त जानकारी लेना नहीं है, बल्कि मतदाता रिकॉर्ड को बेहतर ढंग से सत्यापित करना भी है। अधिकारियों का कहना है कि माता-पिता की SIR जानकारी मिलने से परिवार आधारित रिकॉर्ड का मिलान आसान होगा और एक ही व्यक्ति के अलग-अलग स्थानों पर नाम दर्ज होने जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा।
संयुक्त राष्ट्र की आपत्तियों पर चुनाव आयोग का जवाब
इसी बीच, चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के विशेष रिपोर्टर्स द्वारा जताई गई चिंताओं को भी खारिज कर दिया है।
आयोग का कहना है कि SIR पूरी तरह संवैधानिक, पारदर्शी और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप संचालित की जा रही है तथा इसे सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी भी प्राप्त है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही डुप्लीकेट, मृत, दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके, लंबे समय से अनुपस्थित और विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों पर क्या बोला आयोग?
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम सहित कुछ क्षेत्रों में अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों पर निर्वाचन आयोग ने किसी भी प्रकार के भेदभाव से इनकार किया है।
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि जिन मामलों में नाम हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई, वहां संबंधित मतदाताओं को आपत्ति दर्ज कराने और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था। आयोग का दावा है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित की जा रही है।
नए आवेदकों के लिए क्या है सबसे जरूरी बात?
यदि आप पहली बार वोटर कार्ड बनवाने जा रहे हैं, तो अब आवेदन करते समय केवल सामान्य दस्तावेज ही नहीं, बल्कि माता-पिता की SIR संबंधी जानकारी भी तैयार रखनी होगी। निर्वाचन आयोग के इस नए प्रावधान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाना है, ताकि भविष्य में पहचान और सत्यापन से जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सके।











